उज्जैन की शाही मस्जिद को लेकर क्यों मचा है बवाल, हिंसा-प्रदर्शन के बाद अब आगे क्या होगा?
उज्जैन में शाही मस्जिद का एक हिस्सा गिराने को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि सोमवार को भीड़ ने हिंसक रूप धारण कर लिया। पुलिसकर्मियों पर पत्थर बरसाए गए। क्या है पूरा विवाद, क्यों हिंसक हुई भीड़ और अब आगे क्या होगा?

Highlights
- उज्जैन के शाही मस्जिद को लेकर क्यों मचा है बवाल?
- शाही मस्जिद का क्या है इतिहास?
- बवाल के बाद आगे क्या होगा?
भारी सुरक्षा के बीच आज उज्जैन में शाही मस्जिद का एक हिस्सा हटाने का काम फिर से शुरू होगा। कल पत्थरबाज़ी की घटनाओं के बाद भीड़ और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिससे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। हालांकि, अभी स्थिति सामान्य है। उज्जैन की शाही मस्जिद को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब मध्य प्रदेश सरकार ने इस शहर को 2028 के सिंहस्थ कुंभ के लिए तैयार करने का आदेश दिया और आदेश के बाद अधिकारियों ने सड़क चौड़ी करने के प्रोजेक्ट के तहत मस्जिद के एक हिस्से को हटाने का काम शुरू किया।
उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ को लेकर सड़क 15 मीटर चौड़ी होगी, उसकी जद में आ रहे शाही मस्जिद का पहला हिस्सा 3.5 फीट और दूसरा हिस्सा 8 फीट गिरेगा, बाकी मस्जिद सुरक्षित रहेगी। बड़ी मीनार को दूसरी ओर शिफ्ट किया जाएगा और मस्जिद से लगे दुकानों के लिए दूसरी जगह दी जाएगी। समझौते के तहत मुस्लिम समाज के लोग खुद ही मस्जिद का हिस्सा गिराने के लिए तैयार हैं। कल मस्जिद का हिस्सा हटाए जाने के दौरान हुए हंगामे के बाद पुलिस ने आठ एफआईआर दर्ज की है, 15 उपद्रवी गिरफ़्तार किए गए हैं। इसके साथ ही पांच सोशल मीडिया एकाउंट पर भी केस दर्ज कराए गए हैं और 100 से ज़्यादा कंटेंट हटाए गए हैं।
क्या है शाही मस्जिद विवाद
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 9 सितंबर को उज्जैन के शाही मस्जिद मामले में दायर याचिका खारिज कर दी थी। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर खंडपीठ) ने व्यापक लोक हित, जन सुरक्षा और सिंहस्थ यातायात प्रबंधन को सर्वोपरि मानते हुए मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई को हरी झंडी दे दी थी। कोर्ट ने जिला प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच हुए समझौते के आधार पर मामले को डिस्पोज ऑफ कर दिया। कमेटी और प्रशासन के बीच समझौते के तहत सड़क के लिए 3 फीट जगह के साथ कुछ दुकानें हटाने पर सहमति बनी थी।
शाही मस्जिद विवाद हिंसा में क्यों बदला
उज्जैन में रविवार (27 सितंबर 2026) की रात हुई मीटिंग में मस्जिद के हिस्से को मुस्लिम पक्ष खुद गिराने पर सहमत हो गया था। सोमवार की सुबह तक शांति थी और शहर की शाही मस्जिद के कुछ हिस्से को मस्जिद कमेटी के लोग खुद तोड़ रहे थे। लेकिन तभी एक वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट किया गया, जिसमें दावा किया गया कि जामा मस्जिद को प्रशासन पूरी तरह ध्वस्त करना चाहता है और बुलडोजर भी पहुंच चुके हैं। ऐसी अफवाह फैलते ही मस्जिद के आसपास हजारों की भीड़ जुट गई और भीड़ ने आगे बढ़ने की कोशिश की। जब पुलिस ने भीड़ को रोका तो लोगों ने पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसमें कई पुलिस वाले घायल हो गए।
इसके बाद पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले दागे और फिर लाठीचार्ज करके भीड़ को खदेड़ा। इस दौरान उपद्रवियों ने पुलिस पर जमकर पत्थर फेंके, भीड़ में शामिल महिलाएं भी बैरिकेडिंग हटाने लगीं। पुलिस प्रशासन से उलझने की कोशिश करती महिलाओं को पुलिस ने रोका। पुलिस पर हुए भीड़ के हमले और मस्जिद के बाहर जमा भीड़ को हटाने के दौरान महिला थाना प्रभारी घायल हो गईं। पुलिस पर हमला कर रही भीड़ को दौड़ा - दौड़ा कर पीटा गया।
मस्जिद मैनेजमेंट ने क्या तर्क दिया?
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि मस्जिद एक प्राचीन धार्मिक इमारत है और प्रेयर हॉल, मीनार और दूसरी संरचनाओं के हिस्सों को हटाने से उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सड़क की ज़रूरी चौड़ाई पाने के लिए मस्जिद के पास मौजूद दूसरी संपत्तियों को हटाया जा सकता है। मस्जिद प्रबंधन ने तर्क दिया कि अधिकारियों को मस्जिद को छुए बिना सड़क के दूसरी तरफ के ढांचों को हटाने या किसी दूसरे रास्ते (अलाइनमेंट) पर विचार करना चाहिए।
नगर निगम के नक्शे और पैमाइश के अनुसार, शाही मस्जिद का अगला हिस्सा (लगभग 9 से 11 फीट चौड़ा भाग) इस 15 मीटर की सड़क की जद (अलाइनमेंट) में आ रहा था। मस्जिद प्रबंधन के अनुसार, इस कार्रवाई से उनके प्रार्थना कक्ष (जमात खाना), परिसर के मजहर चौक और लगभग 120 फीट ऊंची मीनार का हिस्सा प्रभावित हो रहा है।
कितनी पुरानी है उज्जैन की शाही मस्जिद?
मस्जिद के इमाम और वक्फ प्रबंधन के अनुसार, यह मस्जिद वर्ष 1390 ईस्वी में बनी थी, जिससे इसका इतिहास लगभग 636 साल पुराना (14वीं शताब्दी के अंत का) हो जाता है। इस मस्जिद के 636 साल पुराने होने का दावा मुख्य रूप से मस्जिद के इमाम मोहम्मद इब्राहिम ने किया है। लेकिन इस तारीख की पुष्टि करने वाले ऐतिहासिक रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से स्पष्ट तौर पर सामने नहीं आए हैं। तमाम उपलब्ध जानकारियों के मुताबिक उज्जैन की ऐतिहासिक शाही मस्जिद लगभग 600 से 630 साल पुरानी मानी जाती है और इसका संबंध 14वीं शताब्दी के अंत से है।
इसे शाही मस्जिद क्यों कहा जाता है?
यह मस्जिद उज्जैन के पुराने इलाके छतरी चौक (कंठल क्षेत्र) में स्थित है। इतिहासकारों और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मस्जिद का निर्माण मालवा के पहले स्वतंत्र शासक दिलावर खान गोरी के शासनकाल (लगभग 1390 ईस्वी) के आसपास हुआ था। इस मस्जिद का निर्माण मध्यकालीन सल्तनत कालीन वास्तुकला के अनुसार किया गया था। प्राचीन काल में मालवा के शासक, उनका शाही काफिला और बड़े प्रशासनिक अधिकारी विशेष पर्वों और जुमे (शुक्रवार) की नमाज के लिए इसी स्थान पर आते थे, जिसके कारण यह मस्जिद 'शाही मस्जिद' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
मस्जिद का हिस्सा गिराना क्यों जरूरी है?
शाही मस्जिद उज्जैन में शहर के पुराने बाज़ार इलाके में गोपाल मंदिर के पास छतरी चौक पर स्थित है। यह जगह इसलिए अहम है क्योंकि यह मस्जिद कंथल चौराहा और गोपाल मंदिर को जोड़ने वाली सड़क पर है; यह रास्ता महाकालेश्वर मंदिर और क्षिप्रा नदी की ओर भी जाता है। इस सड़क का इस्तेमाल शाही सवारी और पेशवाई जैसे धार्मिक जुलूसों के दौरान भी किया जाता है और 2028 के सिंहस्थ के दौरान यहां भारी भीड़-भाड़ होने की उम्मीद है। उज्जैन नगर निगम का कहना है कि ट्रैफिक मैनेजमेंट और लोगों की सुरक्षा के लिए सड़क चौड़ी करना ज़रूरी है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने क्या कहा?
9 सितंबर को, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के एक जज ने प्रस्तावित तोड़फोड़ को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं को खारिज कर दिया। अपने आदेश में, कोर्ट ने कहा कि उसी सड़क पर 10 मंदिरों और एक मस्जिद के कुछ हिस्सों को पहले ही हटाया जा चुका था और उज्जैन में लगभग 80 धार्मिक स्थलों से जुड़े ढांचों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि आने वाला सिंहस्थ, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सार्वजनिक सुरक्षा महत्वपूर्ण बातें थीं। अदालत ने सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की उम्मीदों और बेहतर सुविधाएं देने व ट्रैफिक मैनेजमेंट की ज़रूरत पर भी ध्यान दिया।
मस्जिद विवाद पर सियासत तेज
गिरिराज सिंह क्या बोले?
गिरिराज सिंह ने अपने वीडियो पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ‘उज्जैन में जारी हंगामा देश में सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की एक सोची समझी साजिश है. जब विकास कार्यों के लिए मंदिरों को हटाया गया, तब हिंदू समाज ने कानून का सम्मान करते हुए परिपक्वता दिखाई, लेकिन अब शाही मस्जिद पर पूरी तरह से वैध और कानूनी कार्रवाई होने पर बवाल करवाना, देश में विद्रोह फैलाने के गंदे मंसूबे को साफ दर्शाता है.’
क्या बोले ओवैसी?
AIMIM चीफ और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शाही मस्जिद के मुद्दे पर मीडिया से बातचीत में कहा, ‘मैं सलाम करता हूं उस जनता को, वो लोग गांधी के रास्ते पर चलकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि इस तरीके से मस्जिदों को शहीद नहीं किया जा सकता है। मैं संसद में जिस बात का जिक्र किया था कि जो नया वक्फ संशोधन कानून है, उसके तहत जिले के कलेक्टरों और सरकारों को जो ताकत दी जा रही है, उसका मकसद सिर्फ एक ही की मस्जिदों को, दरगाहों को, खानखांहों को, कब्रिस्तानों को और ईदगाहों को मुसलमानों से छीन लिया जाए, वो सच साबित हो रहा है।’
अखिलेश यादव ने क्या कहा
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश स्थित उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के क्रम में शाही मस्जिद के एक हिस्से को तोड़े जाने के बीच बड़ी प्रतिक्रिया दी है। सपा चीफ ने कहा है कि हमारे मुसलमान धैर्य रखें। अधिकार छीनने वालों को संविधान सजा देगा। कन्नौज सांसद ने कहा कि सबसे ज्यादा अवैध इमारत जो है वो बीजेपी के पास है।
अब आगे क्या होगा?
कोर्ट के अंतिम रुख और प्रशासन व मस्जिद कमेटी के बीच हुए हालिया समझौतों के आधार पर आगे की रूपरेखा तय हो चुकी है और सहमति के आधार पर केवल 3 फीट हिस्सा हटेगा। मस्जिद की 120 फीट ऊंची बड़ी मीनार को तोड़ा नहीं जाएगा, बल्कि उसे तकनीकी रूप से दूसरी ओर शिफ्ट किया जाएगा। जो दुकानें इस कार्रवाई में हटाई जा रही हैं, उनके दुकानदारों को प्रशासन द्वारा वैकल्पिक जगह आवंटित की जाएगी और मस्जिद प्रबंधन को इसके बदले नियमानुसार FAR (फ्लोर एरिया रेशियो) और TDR (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) दिए जाएंगे।
छतरी चौक और कंठाल क्षेत्र में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और भारी पुलिस बल (2,500 से अधिक जवान) तैनात रहेंगे ताकि दोबारा कोई अप्रिय घटना न हो। शहर काजी खलीक उर रहमान ने वीडियो संदेश जारी कर लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांतिपूर्वक घरों में रहने की अपील की है। मस्जिद का बाधक हिस्सा हटाने का शेष कार्य शांतिपूर्वक तरीके से समाज के लोगों द्वारा ही मिलकर पूरा कराया जाएगा।
लॉ एंड ऑर्डर को संभालने के लिए 2500 पुलिस के जवान और अधिकारी तैनात हैं। जिले के डीएम और एसपी लगातार कैंप कर रहे हैं। बिना आआईडी कार्ड के पूरे क्षेत्र में किसी को एंट्री-एग्जिट की परमिशन नहीं है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।
देखें वीडियो
ये भी पढ़ें:
उज्जैन शाही मस्जिद विवाद, पुलिस ने पत्थरबाजों पर कसा शिकंजा, 7 पर FIR, 15 से ज्यादा को किया गिरफ्तार