अमेरिका में EVM से नहीं, बैलेट पेपर से ही क्यों होते हैं चुनाव, कैसे होती है वोटों की गिनती? जानें पूरी डिटेल्स
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव हो चुके हैं और रिजल्ट भी आ गया है। देश में अभी भी ईवीएम नहीं, बैलेट पेपर से ही चुनाव होते हैं। अमेरिका में लाखों, करोड़ों वोटों की गिनती इतनी जल्दी कैसे हो जाती है, जानें क्या है काउंटिंग की पूरी प्रक्रिया?

Highlights
- अमेरिका में कैसे होते हैं चुनाव?
- EVM नहीं, बैलेट पेपर से ही क्यों होते हैं चुनाव?
- कैसे होती है वोटों की गिनती?
अमेरिका में क्या है चुनाव प्रक्रिया
अमेरिका का चुनाव भारत से काफी अलग है। अमेरिका में भारत की तरह ईवीएम (EVM) का इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि अमेरिकी नागरिक मुख्य रूप से पेपर बैलेट (कागज के मतपत्रों) पर वोट डालते हैं और इन मतपत्रों की गिनती इलेक्ट्रॉनिक स्कैनर मशीनों द्वारा की जाती है।
अमेरिका में कैसे होती है वोटों की गिनती
- अमेरिका में पूरे देश के वोटों की गिनती किसी एक केंद्रीय स्थान पर नहीं होती है।
- चुनाव का संचालन पूरी तरह से स्थानीय प्रशासन (काउंटी, शहरों और कस्बों) के हाथ में होता है।
- पूरे देश में 10,000 से ज्यादा स्थानीय निर्वाचन क्षेत्रों में वहां की स्थानीय टीमें और मशीनें एक साथ स्वतंत्र रूप से मतगणना करती हैं।
- मतदाता पेपर बैलेट पर अपने पसंदीदा उम्मीदवार के नाम के आगे बने गोले या बॉक्स को पेन से भरते हैं
- इसके बाद इस बैलेट पेपर को इलेक्ट्रॉनिक स्कैनर मशीन में डाला जाता है और यह स्कैनर मार्किंग को पढ़ता है और उम्मीदवार के खाते में वोट जोड़ता है। बड़े काउंटिंग सेंटरों पर हाई-स्पीड मशीनें होती हैं जो एक घंटे में हजारों बैलेट स्कैन कर सकती हैं।
- कुछ छोटे या विशिष्ट इलाकों में आज भी हाथों से भी वोटों की गिनती की जाती है।
- चुनाव के दिन मतदान केंद्र पर जाकर व्यक्तिगत रूप से डाले गए वोट (इनकी गिनती सबसे पहले शुरू होती है)।
- चुनाव के मुख्य दिन से पहले जाकर डाले गए वोट।
- डाक (Mail) के जरिए भेजे गए मतपत्र। इनकी जांच और हस्ताक्षर का मिलान (सत्यापन) करने में अधिक समय लगता है।
- अगर किसी मतदाता की पात्रता (Eligibility) पर कोई संदेह होता है, तो उसे यह बैलेट दिया जाता है। पात्रता की पुष्टि होने के बाद ही इसे गिना जाता है।
- वोटों की गिनती में इस्तेमाल होने वाली मशीनों को इंटरनेट से कनेक्ट नहीं किया जाता है ताकि हैकिंग का कोई खतरा न रहे।
- मशीनों की सुरक्षा के लिए उन पर विशेष सील लगाई जाती है।
- मतगणना कक्षों में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों (डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन) के पर्यवेक्षक (Observers) मौजूद रहते हैं ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे।
- मूल पेपर बैलेट को संभालकर रखा जाता है ताकि किसी विवाद, ऑडिट या दोबारा गिनती (Recount) की स्थिति में उनका दोबारा मिलान किया जा सके।
मतदान खत्म होने के बाद कैसे घोषित होते हैं नतीजे
- स्थानीय चुनाव अधिकारी हर एक मतपत्र की बारीकी से जांच करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि गिने गए वोटों की संख्या कुल मतदाताओं की संख्या से मेल खाती है।
- स्थानीय स्तर पर जांच पूरी होने के बाद, राज्य के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट या स्टेट कैनवास बोर्ड नतीजों को आधिकारिक रूप से प्रमाणित (Certify) करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में अलग-अलग राज्यों के नियमों के अनुसार कुछ दिनों से लेकर हफ़्तों तक का समय लग सकता है।
अमेरिका जैसी तकनीकी रूप से उन्नत महाशक्ति में आज भी चुनावों के लिए मुख्य रूप से पेपर बैलेट (कागज के मतपत्रों) का उपयोग सुरक्षा, पारदर्शिता और ऑडिट (सत्यापन) की अचूक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। वर्तमान में अमेरिका के लगभग 98% मतदाता किसी न किसी रूप में पेपर बैलेट या पेपर ट्रेल (कागजी रिकॉर्ड) के जरिए ही अपना वोट डालते हैं।
ईवीएम क्यों नहीं होता इस्तेमाल
- साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और चुनाव अधिकारियों का मानना है कि कंप्यूटर सॉफ्टवेयर या इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को रिमोटली या कोडिंग बदलकर हैक किया जा सकता है।
- इसके विपरीत, कागज पर लगे पेन के निशान को दूर बैठे किसी भी साइबर हमले या वायरस से बदला या डिलीट नहीं किया जा सकता। कागजी मतपत्र पूरी तरह से "अनहैकबल" (Unhackable) होते हैं।
- फिजिकल ऑडिट और रिकाउंट की सुविधा (Verifiable Paper Trail)
- अगर चुनाव के नतीजों को लेकर कोई विवाद, धोखाधड़ी का आरोप या कानूनी चुनौती खड़ी होती है, तो अधिकारी हाथ से (Manual Hand Count) उन पेपर बैलेट का दोबारा मिलान कर सकते हैं।
- अमेरिका के लगभग सभी राज्यों में यह नियम है कि इलेक्ट्रॉनिक मशीनों (स्कैनर्स) द्वारा गिने गए वोटों की सत्यता जांचने के लिए औचक रूप से कुछ प्रतिशत पेपर बैलेट की हाथ से गिनती (रैंडम ऑडिट) की जाती है ताकि मशीन की सटीकता 100% साबित हो सके।
क्यों होते हैं बैलेट पेपर से चुनाव
- साल 2000 का 'बुश बनाम गोर' विवाद: उस समय फ्लोरिडा राज्य में पंच-कार्ड मशीनों (Punch-card ballots) के कारण मतों की गिनती में भारी भ्रम पैदा हुआ था, जिसके बाद फिजिकल पेपर ट्रेल की मांग बढ़ गई।
- साल 2016 के विदेशी हस्तक्षेप के आरोप: 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में विदेशी हैकर्स द्वारा इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में सेंध लगाने की कोशिशों के दावों के बाद, अमेरिका ने पूरी तरह से डिजिटल या बिना पेपर वाली मशीनों को हटाना शुरू कर दिया। इसके बाद संघीय सरकार से मिलने वाले फंड का उपयोग राज्यों ने वापस पेपर बैलेट सिस्टम को मजबूत करने में किया।
- अमेरिका में चुनाव के दिन (मंगलवार) छुट्टी नहीं होती। इसलिए बड़ी संख्या में लोग मतदान केंद्र पर जाए बिना, हफ्तों पहले ही डाक (Mail) के जरिए अपना वोट भेज देते हैं।
- घर बैठे वोट डालने की इस 'एब्सेंटी' या 'मेल-इन' व्यवस्था के लिए पेपर बैलेट ही एकमात्र व्यावहारिक और कानूनी जरिया है।
- अमेरिका में कोई केंद्रीय चुनाव आयोग (जैसे भारत का EC) नहीं है। हर काउंटी (जिला) अपने चुनाव नियम और मशीनें खुद तय करती है।
- पूरे देश के लिए नई और अत्यधिक सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें खरीदना और उन्हें हर दो साल में अपग्रेड करना स्थानीय प्रशासन के बजट पर बहुत बड़ा बोझ बनता है।
- पेपर बैलेट और उन्हें स्कैन करने वाली मशीनें ज्यादा किफायती और टिकाऊ साबित होती हैं।
संक्षेप में कहें तो, अमेरिका का चुनाव मॉडल "वोट डालने के लिए पेपर और गिनती के लिए तकनीक के हाइब्रिड सिद्धांत पर काम करता है। यह व्यवस्था तकनीक की तेजी और कागज की सुरक्षा दोनों का भरोसा देती है।
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