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इतना अमीर देश, 83 अरब डॉलर की सेना, हूतियों का मुकाबला क्यों नहीं कर पा रही सऊदी आर्मी?

यमन के हूती विद्रोही खाड़ी के अमीर देश सऊदी अरब पर लगातार हमला कर रहे हैं। 83 अरब डॉलर की सेना वाला सऊदी अरब हूतियों को जवाब क्यों नहीं दे रहा। आखिर उसकी क्या मजबूरी है? जानिए इस एक्सप्लेनर में....

सऊदी अरब हूतियों को क्यों नहीं दे रहा जवाब- India TV Hindi
सऊदी अरब हूतियों को क्यों नहीं दे रहा जवाब

Highlights

  • सऊदी अरब पर हूती क्यों कर रहे हमले
  • हूतियों का मुकाबला क्यों नहीं कर पा रहा सऊदी
  • दोनों की सेनाएं कितनी मजबूत हैं

सऊदी अरब पर ईरान-समर्थित हूती विद्रोही लगातार हमले कर रहे हैं। इस वीकेंड यानी शनिवार को हूतियों ने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर जानलेवा हमला किया। तेल से मालामाल और धनवान इस देश पर एक दशक से भी ज़्यादा समय में हुआ सबसे घातक हमला किया गया, जिसमें 12 लोग मारे गए और 300 से ज़्यादा घायल हो गए। इसके बाद राजनयिक मिशनों को अपने नागरिकों को उस जगह से दूर रहने की चेतावनी देनी पड़ी।

हूती क्यों कर रहे हैं हमले
सऊदी अरब और हूतियों के बीच यह तनाव तब बढ़ा जब ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों और सऊदी-समर्थित यमन की सरकार के बीच हुआ समझौता इस साल की शुरुआत में टूट गया और सऊदी अरब ने यमन में अपनी सैन्य भागीदारी बढ़ा दी। पिछले महीने हूती विद्रोहियों ने लाल सागर तट के पास रणनीतिक इलाकों पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद, सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ हमले शुरू किए। इसके जवाब में हूतियों ने सऊदी अरब के अहम तेल और पर्यटन बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है।

हमले से धूमिल हो रही है सऊदी की छवि
हूतियों के हमले ने धनवान देश सऊदी अरब की अरबों डॉलर की रक्षा क्षमताओं की कमज़ोरियों को उजागर कर दिया है। इस हमले से तेल से मालामाल इस देश की स्थिरता और सुरक्षा की छवि को भी नुकसान पहुंचा है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने देश को निवेश और व्यापार के लिए क्षेत्र की सबसे सुरक्षित जगह के तौर पर स्थापित करने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए हैं।

सऊदी से मजबूत है क्या हूती की सेना 
सऊदी अरब के पास दुनिया की सबसे अच्छी तरह से सुसज्जित सेनाओं में से एक है। रियाद ने 2025 में अपने रक्षा खर्च पर अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 6.5 प्रतिशत, यानी लगभग 83 बिलियन डॉलर खर्च किया, जो दुनिया का आठवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च है। इसके साथ ही इस देश ने हाल ही में तुर्की और पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता किया है। इसकी सैन्य-औद्योगिक क्षमता सीमित है, इसलिए इसने आयातित अत्याधुनिक हथियारों पर भारी खर्च किया है।

सऊदी के पास शानदार सैन्य हार्डवेयर हैं, जैसे F-15 फाइटर जेट, यूरोफाइटर टाइफून, पैट्रियट और THAAD मिसाइल सिस्टम, और अन्य अत्याधुनिक उपकरण। रियाद के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों ने पिछले सप्ताह पूरे यमन में हूती ठिकानों पर हमले किए हैं, ताकि यमनी सरकारी सेना के खिलाफ ईरान समर्थित समूह की हालिया बढ़त को रोका जा सके।

हूतियों के पास मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं, जैसे कि 'फिलिस्तीन-2' (Palestine-2), जो हाइपरसोनिक क्षमताओं वाली दो-चरण वाली ठोस ईंधन मिसाइल है, और 'तूफान' (Toufan), जो ईरान की 'गदर' (Ghadr) मिसाइल का ही रीब्रांडेड संस्करण प्रतीत होता है। अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, विद्रोहियों के पास कई कम दूरी की मिसाइलें भी हैं, जैसे कि उनकी 'बुरकान' (Burkan) और 'बद्र' (Badr) श्रृंखला, जिनके बारे में माना जाता है कि वे ईरानी मूल की हैं।

Image Source : IndiaTVsaudi

हूतियों ने कैसे परेशानी में डाला है सऊदी अरब को?
सऊदी अरब अपनी सेना पर अरबों डॉलर खर्च करता है, फिर भी हूती के हमले उसकी सुरक्षा व्यवस्था को भेदकर अंदर आ ही जाते हैं। जानकारों का मानना ​​है कि इसके पीछे सऊदी अरब का विशाल आकार एक वजह हो सकती है।हूती हमलों से सऊदी अरब की एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ रहा है और इंटरसेप्टर्स (हमले को रोकने वाली मिसाइलें) भी खत्म हो रहे हैं। 

 

हूती क्यों कर रहे हैं हमले?
हूती अब "खेल के नियम बदलना" चाहते हैं।  ईरान समर्थित यह समूह सऊदी अरब के साथ वही करना चाहता है जो सऊदी अरब उनके साथ करता है। उनके पास हज़ारों की संख्या में ऐसे लड़ाके हैं जो अच्छी तरह से प्रशिक्षित, दृढ़ और यमन के कठिन पहाड़ी इलाकों में लड़ने में माहिर हैं। उनकी मिसाइलें और ड्रोन सालों से तेल-समृद्ध खाड़ी देशों के लिए खतरा बने हुए हैं, और हाल ही में इज़राइल तक भी पहुंच गए हैं।

सऊदी की क्या है मजबूरी

सऊदी अरब को उम्मीद थी कि अमेरिका उसकी सुरक्षा में सीधे तौर पर बड़ी मदद करेगा, लेकिन अमेरिकी स्तर से स्पष्ट समर्थन या कड़ा रुख न मिलने के कारण सऊदी खुद को कूटनीतिक और सामरिक रूप से असुरक्षित महसूस कर रहा है। सऊदी अरब यमन के जटिल और पहाड़ी इलाकों में फिर से किसी बड़े सीधे जमीनी युद्ध (Ground War) में नहीं उलझना चाहता, क्योंकि इससे भारी आर्थिक और मानवीय नुकसान का जोखिम रहता है।

सऊदी अरब हूतियों को पूरी तरह समाप्त करने की कोशिश में ईरान को सीधे तौर पर इस जंग में नहीं घसीटना चाहता, इसलिए वह एक सीमित और नपे-तुले संघर्ष की रणनीति अपनाता आया है जो कई बार असरकारक साबित नहीं होती।

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