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Explainer: क्या है 136 साल पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद का विवाद, कोलकाता एयरपोर्ट के अंदर क्यों बंद हुई नमाज, अधिकारियों ने क्या बताया?

गौरीपुर जामा मस्जिद एयरपोर्ट से भी पुरानी है। इसी वजह से एयरपोर्ट के अंदर लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति थी। हालांकि, रनवे के पास बनी मस्जिद में आने वाले लोगों से एयरपोर्ट की सुरक्षा को खतरा बना हुआ था।

Kolkata Airport- India TV Hindi
Image Source : FB/NETAJI SUBHAS CHANDRA BOSE AIRPORT बांकुड़ा मस्जिद कोलकाता एयरपोर्ट के अंदर है

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अंदर नमाज बंद हो चुकी है। एयरपोर्ट परिसर में बनी गौरीपुर जामा मस्जिद (बाकुड़ा जामा मस्जिद) में जाने वाले लोगों को अब पास नहीं जारी किए जा रहे हैं। इस पर विवाद हो रहा है। तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा कि जब इस मुद्दे पर अधिकारियों के साथ बातचीत जारी है, तो मस्जिद में नमाज पर रोक लगाने की कोई जरूरत नहीं थी। चौधरी ने कहा, ''यह मस्जिद 135 साल से अधिक पुरानी है और इस मुद्दे पर बातचीत जारी है। किसी भी सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए हम तैयार हैं। नमाज के लिए लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने की कोई जरूरत नहीं थी।'' 136 साल पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद का विवाद क्या है, एयरपोर्ट के अंदर नमाज क्यों बंद हुई और अधिकारियों ने क्या बताया... आइए जानते हैं।

एयरपोर्ट अधिकारियों ने क्या बताया?

एयरपोर्ट अधिकारियों ने बताया कि बांकड़ा मस्जिद के नाम से मशहूर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के अंदर स्थित 136 साल से अधिक पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद में शनिवार से तीन दिनों के लिए नमाज पर रोक लगा दी गई है, क्योंकि मस्जिद का नवीनीकरण किया जा रहा है।

क्या है 136 साल पुरानी गौरीपुर जामा मस्जिद का विवाद?

गौरीपुर जामा मस्जिद नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से भी ज्यादा पुरानी है। अंग्रेजों ने यह एयरपोर्ट बनाया था। उस समय मस्जिद एयरपोर्ट से दूर थी और इससे किसी को परेशानी नहीं थी। धीरे-धीरे एयरपोर्ट का आकार बढ़ता गया और मस्जिद इसके बेहद पास आ गई। अब यह मस्जिद लेवल-3 सिक्योरिटी जोन में आ चुकी है। लेवल-3 सिक्योरिटी जोन हर एयरपोर्ट का सबसे संवेदनशील इलाता होता है, जहां सबसे ज्यादा सुरक्षा होती है। प्रधानमंत्री समेत सभी वीवीआईपी की एंट्री इसी इलाके से होती है। मस्जिद एयरपोर्ट के दूसरे रनवे से मजह 300 मीटर दूर है। इस वजह से इसके कारण सुरक्षा को सबसे ज्यादा खतरा है।

पास के जरिए नमाज पढ़ने जाते हैं लोग

गौरीपुर जामा मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए लोगों को पहले एयरपोर्ट के सुरक्षा अधिकारियों से पास लेना होता है। यह पास आधार कार्ड के जरिए बनता है, लेकिन इसके लिए पासपोर्ट या अन्य दस्तावेज जरूरी नहीं होते। ऐसे में सिर्फ आधार कार्ड दिखाकर कोई भी व्यक्ति एयरपोर्ट परिसर में दाखिल हो सकता है। मस्जिद परिसर के ढाई किलोमीटर अंदर है। इससे सुरक्षा को खतरा पैदा होता है। वहीं, यह एयरपोर्ट ऐसी जगह है, जो बांग्लादेश बॉर्डर से बेहद पास है। इसी वजह से मस्जिद को एयरपोर्ट से अलग करने की बात हो रही है।

1890 के दशक में बनी थी मस्जिद

यह मस्जिद 1890 के दशक में बनी थी। इस समय यहां कोई एयरपोर्ट नहीं था। उत्तर 24 परगना के गांव में बांकुड़ा मस्जिद बनी थी। 1924 में अंग्रेजों ने इस इलाके में एक एयरडोम विकसित किया। इस समय मस्जिद से विमानों को कोई समस्या नहीं थी। देश को आजादी मिलने के बाद एयरपोर्ट का आकार बढ़ा और 1962 में पश्चिम बंगाल सरकार ने गांव का बड़ा हिस्सा खाली कराकर एयरपोर्ट अथॉरिटी को सौंप दिया। हालांकि, मस्जिद को नहीं हटाया गया और फैसला हुआ कि मस्जिद अपनी जगह बनी रहेगी। इसी फैसले की वजह से विवाद अब तक बना हुआ है।

मस्जिद को शिफ्ट करने की कोशिशें जारी

इस मस्जिद को एयरपोर्ट परिसर के बाहर शिफ्ट करने की कोशिशें जारी हैं। मस्जिद कमेटी के अनुसार एयरपोर्ट अथॉरिटी परिसर के बाहर बड़े इलाके में मस्जिद को शिफ्ट करने का प्लान बना रही है। मस्जिद समिति भी इस मामले में स्थायी समाधान चाहती है और प्रशासन के साथ सहयोग कर रही है। ऐसे में संभावना है कि जल्द ही किसी नए स्थान पर दोबारा से मस्जिद का निर्माण शुरू हो। इस बारे में मस्जिद समिति और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बातचीत जारी है। फिलहाल मस्जिद का नवीनीकरण किया जा रहा है। ऐसे में तीन दिन तक किसी को नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं होगी। इसके बाद का फैसला अधिकारी या मस्जिद समिति के लोग करेंगे।

स्थानीय विधायक ने क्या कहा?

कोलकाता एयरपोर्ट दमदम उत्तर से भाजपा के विधायक सौरव सिकदर के विधानसभा क्षेत्र में आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि हवाई अड्डा परिसर में मस्जिद होने से दोनों रनवे का पूरी तरह उपयोग प्रभावित हुआ है और सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि नमाज के लिए आने वाले लोगों को हवाई अड्डे के पास या पृष्ठभूमि जांच की आवश्यकता नहीं होती। सिकदर ने कहा, "हवाई अड्डा एक सुरक्षित क्षेत्र है। हवाई अड्डे में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को फोटो वाला बायोमेट्रिक पास लेना होता है। यह मस्जिद सबसे अधिक सुरक्षा वाले क्षेत्र में स्थित है, जिसे लेवल तीन कहा जाता है।" सिकदर ने कहा कि इस हवाई अड्डे से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे अति विशिष्ट व्यक्तियों (वीवीआईपी) के अलावा हर महीने लाखों यात्री आते-जाते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने यह मुद्दा अधिकारियों के सामने उठाया है और दावा किया है कि मौजूदा व्यवस्था से सुरक्षा संबंधी खतरा हो सकता है।

सीएम शुभेंदु अधिकारी ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को कहा कि जिस स्थान का भू-राजनीतिक महत्व बहुत अधिक हो, उसके गेट बाहरी लोगों के लिए खुले नहीं रखे जा सकते। पूर्व मेदिनीपुर जिले के तमलुक में भाजपा की विशेष संगठनात्मक बैठक के बाद अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कोलकाता एयरपोर्ट की सुरक्षा सर्वोपरि है। अधिकारी ने कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा और हवाई अड्डे की सुरक्षा को हर चीज पर प्राथमिकता मिलेगी। मुख्यमंत्री के रूप में मैं इस पर और कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का स्थान बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि चीन और बांग्लादेश दोनों इसके करीब हैं। इसके गेट बाहरी लोगों के लिए खुले नहीं रखे जा सकते। हमने किसी को धर्म का पालन करने से नहीं रोका है। बकरीद पशु वध कानूनों का पालन करते हुए मनाई गई, मुहर्रम बिना हथियारों के प्रदर्शन के मनाया गया और कोई समस्या नहीं हुई। कानून का पालन करें और अच्छे नागरिक की तरह व्यवहार करें। अपने धर्म का पालन व्यक्तिगत रूप से करें, दूसरों को प्रभावित करने की कोशिश न करें। तब सब कुछ सुचारु रूप से चलेगा।"

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