AI पर क्यों आमने-सामने आईं दो पीढ़ियां? बुजुर्ग बोले क्रांति, Gen Z ने बताया सबसे बड़ा खतरा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर Gen Z और बुजुर्गों की सोच में बड़ा अंतर उभरकर सामने आया है। जहां पुरानी पीढ़ी AI को तकनीकी क्रांति और उत्पादकता बढ़ाने वाला साधन मानती है, वहीं युवा रोजगार, क्रिएटिविटी, शिक्षा और निर्णय क्षमता पर इसके संभावित नकारात्मक प्रभावों को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं।

Highlights
- मार्टिन स्कॉर्सेसी के AI अपनाने के फैसले पर सोशल मीडिया में तीखी आलोचना हुई।
- कई विश्वविद्यालयों में छात्रों ने AI की तारीफ करने वाले वक्ताओं का विरोध किया।
- युवा AI को रोजगार और रचनात्मकता के लिए खतरा, जबकि बुजुर्ग अवसर मान रहे हैं।
दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कि AI को लेकर बहस लगातार बढ़ रही है। कुछ लोग इसे भविष्य की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति मान रहे हैं, जबकि कई लोगों को डर है कि यह इंसानों की नौकरियां, रचनात्मकता और फैसले लेने की क्षमता को कमजोर कर देगा। हाल ही में मशहूर हॉलीवुड निर्देशक मार्टिन स्कॉर्सेसी ने घोषणा की कि वह जेनरेटिव AI कंपनी ब्लैक फॉरेस्ट लैब्स से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह फिल्मों और टीवी शो की 'स्टोरीबोर्ड' तैयार करने के लिए AI का इस्तेमाल करेंगे। स्टोरीबोर्ड वह प्रक्रिया होती है जिसमें फिल्म की कहानी को पहले चित्रों और दृश्यों के रूप में तैयार किया जाता है।
लेकिन स्कॉर्सेसी की इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर काफी विरोध हुआ। कई लोगों ने कहा कि AI सिनेमा की क्रिएटिविटी को नुकसान पहुंचा सकता है और 'सिनेमा को बर्बाद' कर सकता है।
आखिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कहते किसे हैं?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या AI यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ऐसी तकनीक है, जिसमें कंप्यूटर और मशीनों को इंसानों की तरह सोचने, सीखने, समझने और निर्णय लेने की क्षमता दी जाती है। AI बड़े पैमाने पर उपलब्ध डेटा का विश्लेषण करके सवालों के जवाब देता है, तस्वीरें बनाता है, भाषाओं का अनुवाद करता है, लेख लिखता है, आवाज पहचानता है और कई काम अपने आप कर सकता है। आज AI का उपयोग मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, उद्योग, सुरक्षा और मनोरंजन सहित लगभग हर क्षेत्र में हो रहा है। हालांकि इसके बढ़ते इस्तेमाल से रोजगार, गोपनीयता और रचनात्मकता को लेकर नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।
AI को लेकर क्यों विरोध कर रहे हैं छात्र?
AI को लेकर नाराजगी सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रही। हाल के दिनों में कई विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में छात्रों ने उन मुख्य अतिथियों का विरोध किया, जिन्होंने AI की खुलकर तारीफ की। यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा में प्रॉपर्टी डेवलपर ग्लोरिया कॉलफील्ड ने अपने भाषण में कहा कि 'AI अगली औद्योगिक क्रांति है।' यह सुनते ही विशेष रूप से 'ह्यूमैनिटीज' के छात्रों ने जोरदार हूटिंग शुरू कर दी। इन छात्रों का कहना था कि वे पहले से ही शिक्षा का कर्ज, बेरोजगारी और नौकरी की असुरक्षा जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में AI की तारीफ उनके भविष्य को लेकर चिंता और बढ़ा देती है।
इसी तरह गूगल के पूर्व CEO एरिक श्मिट और बिग मशीन रिकॉर्ड्स के CEO स्कॉट बोर्चेटा को भी AI की तारीफ करने पर छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ा। दोनों इस प्रतिक्रिया से हैरान नजर आए थे। ये घटनाएं बताती हैं कि AI को लेकर अलग-अलग पीढ़ियों की सोच में बड़ा अंतर है।
क्या युवा नई तकनीक के सबसे बड़े समर्थक होते हैं?
आमतौर पर माना जाता है कि नई पीढ़ी हर नई तकनीक को सबसे पहले अपनाती है, लेकिन AI के मामले में तस्वीर अलग दिखाई दे रही है। कई शोध बताते हैं कि Gen Z यानी आज के युवा AI को लेकर काफी सतर्क हैं और कई मामलों में इसका विरोध भी कर रहे हैं। गैलप के एक हालिया सर्वे के मुताबिक अधिकांश युवाओं का मानना है कि AI क्रिएटिविटी और क्रिटिकल थिंकिंग को बेहतर नहीं बनाता। बल्कि उन्हें डर है कि इससे सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसके उलट, 2025 के थॉमसन रॉयटर्स सर्वे में पाया गया कि बेबी बूमर्स या पुरानी पीढ़ी सबसे अधिक आशावादी हैं और उनका मानना है कि AI तेजी से हर कार्यस्थल का हिस्सा बन जाएगा।
बेबी बूमर्स या पुरानी पीढ़ी AI को मौका क्यों मानते हैं?
बेबी बूमर्स वह पीढ़ी है जिसने टाइपराइटर से लेकर कंप्यूटर और वर्ड प्रोसेसर तक का सफर देखा है। उन्होंने लंबे समय तक ऐसे दौर में काम किया, जहां घंटों फाइलें संभालना और दस्तावेज तैयार करना रोजमर्रा की जरूरत थी। सर्वे बताते हैं कि इसी वजह से इस पीढ़ी को AI एक क्रांतिकारी तकनीक लगती है। उनका मानना है कि AI समय बचाता है और पहले इस्तेमाल होने वाली तकनीकों की तुलना में कहीं ज्यादा आसान और समझदार है। टेक्नोलॉजी लेखक जोसाया गोगार्टी का कहना है कि कई बुजुर्ग AI को मनोरंजन का साधन भी मानते हैं। उन्होंने फेसबुक पर लो क्वॉलिटी AI कंटेंट का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह की सामग्री को सोशल मीडिया पर उम्रदराज दर्शक काफी पसंद कर रहे हैं।
युवा AI से सबसे ज्यादा क्यों डर रहे हैं?
युवाओं की सबसे बड़ी चिंता रोजगार है। उन्हें लगता है कि AI भविष्य की नौकरियों को खत्म कर सकता है। जब छात्रों ने स्कॉट बोर्चेटा का विरोध किया तो उन्होंने जवाब दिया,
'इसका सामना करो। कुछ करो। यह एक टूल है, इसे अपने लिए काम में लो।'
लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह सलाह आज की परिस्थितियों को नजरअंदाज करती है। जिन आर्थिक और सामाजिक हालात में पुरानी पीढ़ी ने सफलता हासिल की, वे अब काफी बदल चुके हैं। पहले इंसानी मेहनत की आर्थिक और सामाजिक कीमत कहीं अधिक थी। आज वही व्यवस्था कमजोर पड़ चुकी है। रोजगार की सुरक्षा कम हुई है और करियर बनाने के पारंपरिक रास्ते भी पहले जैसे नहीं रहे। ऐसे में युवाओं को यह कहना कि 'खुद को बदलो, नहीं तो पीछे रह जाओगे', उनके लिए वास्तविक समाधान नहीं लगता।
क्या यह सिर्फ नौकरी का संकट है?
विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। कई युवाओं को लगता है कि वे ऐसे सिस्टम का हिस्सा हैं, जो उनसे लगातार नए बदलाव अपनाने की उम्मीद करता है, लेकिन धीरे-धीरे उनकी जरूरत ही खत्म करता जा रहा है। सामाजिक मनोवैज्ञानिक शोशाना जुबॉफ़ के अनुसार, आज का समाज कई दशकों से चली आ रही बाजार आधारित आर्थिक व्यवस्था का परिणाम है, जहां लोगों के आत्मसम्मान और अपने जीवन पर नियंत्रण की भावना लगातार कमजोर होती जा रही है। हाल ही में एक ऐसी वेबसाइट के बारे में खबर आई थी जहां AI एजेंट्स लोगों को हायर करने की प्रक्रिया में शामिल थे।
एल्गोरिद्म युवाओं की जिंदगी कैसे बदल रहे हैं?
आज एल्गोरिद्म यह तय करने लगे हैं कि लोग क्या देखें, क्या पसंद करें, क्या खरीदें और किस तरह फैसले लें। युवा एक विरोधाभासी स्थिति में जी रहे हैं। एक ओर उन्हें AI अपनाने के लिए कहा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वे खुद महसूस कर रहे हैं कि इससे उनकी पढ़ाई और सीखने की क्षमता प्रभावित हो रही है। 20वीं सदी में लोगों के पास यह विकल्प था कि वे नई तकनीक अपनाएं या नहीं। शोध बताते हैं कि उस समय लोग अपनी जरूरत, जीवनशैली और खर्च के हिसाब से तय करते थे कि कौन-सी तकनीक अपनानी है। ईमेल, मोबाइल फोन, डिजिटल घड़ी या रिमोट वाले टीवी को कभी भी जीवन की अनिवार्य जरूरत नहीं माना गया।
लेकिन आज की स्थिति अलग है। AI और एल्गोरिद्म लगभग हर डिजिटल सेवा, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, पढ़ाई और काम का हिस्सा बन चुके हैं। इसलिए युवाओं के लिए इनसे पूरी तरह दूर रहना लगभग असंभव हो गया है।
आखिर क्या होने जा रहा है AI का भविष्य?
तकनीकी कंपनियों के प्रमुख लगातार कहते हैं कि AI का विस्तार अब रुकने वाला नहीं है और यह भविष्य की अनिवार्य तकनीक है। लेकिन इस पूरी बहस में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली युवा पीढ़ी की चिंताओं पर पर्याप्त संवाद नहीं हो रहा। युवा चाहते हैं कि उनके भविष्य का फैसला केवल तकनीकी कंपनियां या सरकारें न करें। वे चाहते हैं कि AI का इस्तेमाल संतुलित तरीके से हो और इंसानों की भूमिका, रचनात्मकता और रोजगार भी सुरक्षित रहें। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जेनरेशन-जेड का खुला विरोध इस बात का संकेत है कि AI से भरे भविष्य के अलावा भी दूसरे रास्तों पर विचार किया जा सकता है। (द कन्वर्सेशन से इनपुट के साथ)
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