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कैप्टन स्मित पर हमले की जांच में क्यों कूदा ऑस्ट्रेलिया? ओमानी को-पायलट से है खास कनेक्शन

फ्लाईदुबई हमले के आरोपी ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी का ऑस्ट्रेलिया कनेक्शन सामने आने के बाद वहां आतंकवाद रोधी जांच शुरू हो गई है। एजेंसियां उसके छात्र जीवन, गतिविधियों, संपर्कों और संभावित कट्टरपंथ की जांच कर रही हैं।

ऑस्ट्रेलिया...- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV ऑस्ट्रेलिया फ्लाईदुबई की घटना की जांच शुरू कर चुका है।

Highlights

  • फ्लाईदुबई हमले के आरोपी को-पायलट के ऑस्ट्रेलिया कनेक्शन की आतंकी जांच शुरू।
  • 2014 में मिला था स्टूडेंट वीजा, 2015 से 2017 तक ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई।
  • ओमान एयर ने चरमपंथी वेबसाइटों पर जाने के बाद उसे फ्लाइट ड्यूटी से हटाया था।

Flydubai FZ1073 Attack: फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में 30 सितंबर को हुए हमले ने पूरी दुनिया को चौंका दिया था। ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी पर भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर कुल्हाड़ी 'क्रैश एक्स' से हमला करने और विमान को अपने कब्जे में लेने की कोशिश का आरोप है। अब इस मामले की जांच ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच गई है। वजह है अल-हमामी का ऑस्ट्रेलिया से पुराना कनेक्शन। उसे 2014 में ऑस्ट्रेलिया का स्टूडेंट वीजा मिला था और उसने 2015 से 2017 तक वहां पढ़ाई की थी। ऐसे में बड़ा सवाल है कि ऑस्ट्रेलिया में रहने के दौरान वह कट्टरपंथ की ओर बढ़ा?

ऑस्ट्रेलिया क्यों कर रहा है जांच?

ऑस्ट्रेलिया की विक्टोरियन ज्वाइंट काउंटर टेररिज्म टीम (VIC JCTT) ने अल-हमामी के ऑस्ट्रेलिया से जुड़े संबंधों की जांच शुरू कर दी है। इस टीम में ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस (AFP), विक्टोरिया पुलिस और ऑस्ट्रेलियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन (ASIO) शामिल हैं। AFP के प्रवक्ता ने कहा,

'VIC JCTT पुष्टि कर सकती है कि वह व्यक्ति ऑस्ट्रेलिया से जुड़े संबंधों की जांच कर रही है। उचित समय पर इस बारे में अपडेट दिया जाएगा।'

जांच का सबसे अहम सवाल है कि क्या अल-हमामी ऑस्ट्रेलिया में रहते हुए कट्टरपंथी विचारों के संपर्क में आया था।

ऑस्ट्रेलिया में कब रहा था अल-हमामी?

रिपोर्ट्स के मुताबिक अल-हमामी को 2014 में ऑस्ट्रेलिया का स्टूडेंट वीजा मिला था। एबीसी न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया कि उसने 2015 से 2017 तक ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की। इसके बाद वह देश से चला गया। लेकिन उसकी वीजा की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। रिपोर्ट के मुताबिक उसका स्टूडेंट वीजा 2019 में रद्द कर दिया गया था, क्योंकि वह किसी कोर्स में नामांकित नहीं था। अब जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई और रहने के दौरान उसके संपर्क किन लोगों से थे और उसकी गतिविधियां कैसी थीं।

Image Source : India TVऑस्ट्रेलिया से फ्लाईदुबई कॉकपिट तक कैसे पहुंचा हमामी?

फ्लाईदुबई की फ्लाइट में आखिर हुआ क्या था?

30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी। इसी दौरान को-पायलट अल-हमामी ने कथित तौर पर कॉकपिट में मौजूद भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर क्रैश एक्स से हमला कर दिया। इसके बाद उसने विमान पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की। हमले के दौरान विमान करीब 30 सेकंड में 16,000 फीट से ज्यादा नीचे आ गया। गंभीर रूप से घायल कैप्टन स्मित ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इसके बाद यात्रियों और क्रू ने अल-हमामी को काबू में किया।

विमान को गिरने से किसने बचाया?

इस घटना में 2 ऑफ-ड्यूटी पायलटों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। ये दोनों उस समय ड्यूटी पर नहीं थे, लेकिन उन्होंने संकट की स्थिति में विमान को संभालने में मदद की। उन्होंने विमान को स्थिर करने और सुरक्षित तरीके से इमरजेंसी लैंडिंग कराने में सहायता की। आखिरकार विमान को सऊदी अरब में सुरक्षित उतारा गया। अगर समय रहते कॉकपिट का नियंत्रण वापस नहीं मिलता, तो स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती थी।

क्या अल-हमामी ने अपना मकसद बताया?

आपातकालीन लैंडिंग के बाद जांचकर्ताओं ने अल-हमामी से पूछताछ की। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक अल-हमामी ने कथित तौर पर पूछताछ में स्वीकार किया कि उसका इरादा विमान को जानबूझकर गिराने का था। रिपोर्ट के अनुसार उसने यह भी कहा कि वह 'मौत से नहीं डरता।' यही वजह है कि जांचकर्ता अब सिर्फ विमान में हुए हमले को नहीं, बल्कि उसके पूरे बैकग्राउंड को खंगाल रहे हैं।

Image Source : India TVऑस्ट्रेलिया की जांच के 5 बड़े सवाल सामने आए हैं।

उसके पुराने रिकॉर्ड में ऐसा क्या मिला?

अल-हमामी के पुराने रिकॉर्ड ने जांच को और गंभीर बना दिया है। WSJ के मुताबिक वह पहले ओमान की सरकारी एयरलाइन ओमान एयर में काम करता था। वहां अधिकारियों को पता चला था कि वह चरमपंथी वेबसाइटों पर जाता था। इसके बाद उसे फ्लाइट ड्यूटी से हटा दिया गया। उसके बारे में जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक उसने बाद में एक डी-रेडिकलाइजेशन कार्यक्रम पूरा किया और उसे प्रशासनिक काम में लगा दिया गया था।

फिर वह फ्लाईदुबई के कॉकपिट तक कैसे पहुंचा?

ओमान एयर से अलग होने के बाद अल-हमामी संयुक्त अरब अमीरात चला गया। फरवरी 2026 में उसे फ्लाईदुबई में नौकरी मिल गई। अब जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उसकी पिछली गतिविधियों और रिकॉर्ड की कितनी जानकारी फ्लाईदुबई के पास थी। यह भी स्पष्ट नहीं है कि फ्लाईदुबई ने उसके पुराने रिकॉर्ड को लेकर ओमान के अधिकारियों से कोई जानकारी मांगी थी या नहीं। WSJ के मुताबिक ओमान को उसकी नौकरी के लिए किसी विदेशी एजेंसी से औपचारिक वेटिंग अनुरोध नहीं मिला था।

ऑस्ट्रेलिया के अलावा किन देशों की नजर है?

मामले की जांच कई देशों में चल रही है। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इजरायल के अधिकारी भी अल-हमामी के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। जांचकर्ता यह पता लगाना चाहते हैं कि उसने हमला अकेले किया या उसके पीछे कोई बाहरी संगठन या नेटवर्क था। जांच में ईरान से संभावित संबंधों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि अभी तक किसी विदेशी संगठन से उसके संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।

Image Source : India TVहमाम अल-हमामी का इंटरनेशनल कनेक्शन सामने आया है।

सीरिया का कनेक्शन क्यों अहम है?

अल-हमामी के पिता ओमानी और मां सीरियाई थीं। उसने अपनी जिंदगी का कुछ हिस्सा सीरिया में बिताया था। उस समय वहां गृहयुद्ध चल रहा था और बशर अल-असद की सरकार के खिलाफ कई इस्लामी चरमपंथी गुट हथियारबंद संघर्ष कर रहे थे। WSJ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि कहीं अल-हमामी का कट्टरपंथ इसी दौर में तो शुरू नहीं हुआ था। यानी उसकी जांच अब ऑस्ट्रेलिया, ओमान और UAE तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके सीरिया में बिताए समय को भी देखा जा रहा है।

उसके सोशल मीडिया से क्या पता चलता है?

अल-हमामी की ऑनलाइन गतिविधियां भी जांच का हिस्सा हैं। उसके डिलीट किए गए X अकाउंट के 3,000 से ज्यादा पुराने स्क्रीनशॉट इंटरनेट आर्काइव में मौजूद हैं। इनमें महिलाओं को लेकर रूढ़िवादी और आपत्तिजनक विचार दिखाई देते हैं। उसने महिलाओं के नौकरी करने पर आपत्ति जताई थी और पर्दा करने वाली धार्मिक महिलाओं को पसंद करने की बात कही थी। एक पोस्ट में उसने सऊदी महिलाओं से संपर्क करने के लिए फर्जी प्रोफाइल बनाने की बात भी बताई थी। उसने यह भी कहा था कि उसकी पत्नी को नौकरी नहीं करनी चाहिए।

ब्रिटेन का कनेक्शन भी सामने आया

अल-हमामी का शिक्षा से जुड़ा रिकॉर्ड केवल ऑस्ट्रेलिया तक सीमित नहीं है। CNN के मुताबिक उसके नाम से पहले सक्रिय रहा एक LinkedIn प्रोफाइल भी मिला है। इसमें बताया गया था कि उसने ब्रिटेन की बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी के जरिए रिमोट यानी दूरस्थ शिक्षा का कोर्स किया था। इसका मतलब है कि जांचकर्ता अब उसके जीवन के अलग-अलग देशों से जुड़े रिकॉर्ड को जोड़ रहे हैं, ताकि यह समझा जा सके कि उसने किन जगहों पर पढ़ाई की, कहां रहा और किन लोगों के संपर्क में रहा।

इस पूरे मामले में सबसे बड़े सवाल क्या हैं?

अल-हमामी की कहानी में कई सवाल अभी अनुत्तरित हैं। पहला, ऑस्ट्रेलिया में रहने के दौरान उसकी गतिविधियां क्या थीं? दूसरा, ओमान एयर को उसके चरमपंथी वेबसाइटों पर जाने की जानकारी थी तो बाद में वह फ्लाईदुबई तक कैसे पहुंचा? तीसरा, फ्लाईदुबई  को उसके बैकग्राउंड के बारे में कितनी जानकारी थी? चौथा, क्या उसने अकेले विमान पर हमला किया या किसी नेटवर्क से जुड़ा था? और पांचवां, क्या उसका कट्टरपंथ ऑस्ट्रेलिया, ओमान या सीरिया में शुरू हुआ? फिलहाल अलग-अलग देशों की जांच एजेंसियां इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही हैं। ()

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