सोना खरीदने से दूरी बना रहे भारतीय, मांग में 29% की भारी गिरावट, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने बताई प्रमुख वजहें

भारत में कुल ज्वैलरी मांग 2025 की दूसरी तिमाही के 125 टन के मुकाबले 20 प्रतिशत घटकर 99.9 टन रह गई। हालांकि, ऊंची कीमतों की वजह से वैल्यू के लिहाज से ये 16 प्रतिशत बढ़कर 1,48,700 करोड़ रुपये हो गई।

भारत में जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान सोने की मांग सालाना आधार पर 29 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 162.5 टन रह गई। इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी, कीमतों में तेज उछाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खरीदारी पर अंकुश लगाने की अपील, मांग में इस बड़ी गिरावट की प्रमुख वजहें बताई जा रही हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने मंगलवार को ये जानकारी दी। WGC के अनुमान के मुताबिक, इस पूरे साल भारत में सोने की मांग 625-675 टन रह सकती है।
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भारत में जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान सोने की मांग सालाना आधार पर 29 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 162.5 टन रह गई। इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी, कीमतों में तेज उछाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खरीदारी पर अंकुश लगाने की अपील, मांग में इस बड़ी गिरावट की प्रमुख वजहें बताई जा रही हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) ने मंगलवार को ये जानकारी दी। WGC के अनुमान के मुताबिक, इस पूरे साल भारत में सोने की मांग 625-675 टन रह सकती है।
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वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की मंगलवार को जारी 'तीसरी तिमाही 2026 में सोने की मांग के रुझान' रिपोर्ट के अनुसार, 2025 की इसी तिमाही में सोने की मांग 229.8 टन रही थी। हालांकि, सोने की मांग की वैल्यू 3 प्रतिशत बढ़कर 2,41,900 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 2,35,090 करोड़ रुपये थी। इस दौरान सोने का औसत भाव 4262 अमेरिकी डॉलर प्रति ट्रॉय औंस (1,48,891 रुपये प्रति 10 ग्राम) रहा। 2025 की इसी अवधि में ये 3457 अमेरिकी डॉलर (1,02,287 रुपये) था। इन कीमतों में इंपोर्ट ड्यूटी और जीएसटी शामिल नहीं हैं।
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भारत में कुल ज्वैलरी मांग 2025 की दूसरी तिमाही के 125 टन के मुकाबले 20 प्रतिशत घटकर 99.9 टन रह गई। हालांकि, ऊंची कीमतों की वजह से वैल्यू के लिहाज से ये 16 प्रतिशत बढ़कर 1,48,700 करोड़ रुपये हो गई। डब्ल्यूजीसी के भारत में रीजनल सीईओ सचिन जैन ने कहा कि जुलाई-सितंबर तिमाही में भारत में सोने की मांग लगातार मजबूत बनी रही, हालांकि ऊंची कीमतों ने उपभोक्ताओं के खरीदारी के व्यवहार को प्रभावित किया।
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सचिन जैन ने बताया कि कुल मांग 162.5 टन रही और इसकी वैल्यू 2,41,900 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इससे पता चलता है कि उपभोक्ता अपनी खरीदारी को किफायती कीमतों और दीर्घकालिक मूल्य के बीच संतुलित करते हुए सोने को प्राथमिकता देना जारी रखे हुए हैं।'' उन्होंने कहा कि इसका असर खास तौर पर ज्वैलरी सेगमेंट में दिखा, जहां सालाना आधार पर मांग 20 प्रतिशत घटी, जबकि इसकी वैल्यू 16 प्रतिशत बढ़ गई।
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उन्होंने कहा, ''तीसरी तिमाही के अंत में सोने की कीमतों में आई गिरावट से ज्वैलरी की मांग को समर्थन मिला है और इससे कुछ टली हुई खरीदारी भी बढ़ गई। शादी और त्योहारों के लिए खरीदारी से भी मांग को समर्थन मिला है, खासकर दक्षिण भारत में, जहां अगस्त में प्रमुख त्योहार आए। ऊंची कीमतों के बीच उपभोक्ता अब सोच-समझकर खरीदारी करने और पुराने सोने के बदले नए आभूषण लेने की योजनाओं को तेजी से अपना रहे हैं। सोने के आभूषणों के प्रति उनकी पसंद बरकरार है।''