'गोंधल' के डायरेक्टर संतोष डावखर कौन हैं? 'धुरंधर' को पीछे छोड़ ऑस्कर में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी फिल्म

मराठी थ्रिलर फिल्म 'गोंधल' 2027 में होने वाले 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। डायरेक्टर संतोष डावखर की यह फिल्म 'धुरंधर' और 'हनुमान अंश' को पीछे छोड़ चुनी गई है।

फिल्ममेकर संतोष डावखर की डायरेक्ट की गई मराठी थ्रिलर फिल्म 'गोंधल' को ऑस्कर 2027 के लिए भारत की ऑफिशियल एंट्री के तौर पर चुना गया है। यह फिल्म 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स में 'बेस्ट इंटरनेशनल फीचर' कैटेगरी में मुकाबला करेगी। इसे विचार के लिए भेजी गई 33 फिल्मों की लिस्ट में से चुना गया है। इस लिस्ट में हिंदी, तेलुगु, तमिल और मराठी फिल्में शामिल थीं। इस घोषणा के बाद से फिल्ममेकर संतोष डावखर भी चर्चा में हैं, जिनका सफर एक प्रोफेसर, प्रोजेक्ट कंसल्टेंट और सोशल एक्टिविस्ट के तौर पर काम करने से जुड़ा रहा है।
1/7 Image Source : Instagram/@santosh_davakhar
फिल्ममेकर संतोष डावखर की डायरेक्ट की गई मराठी थ्रिलर फिल्म 'गोंधल' को ऑस्कर 2027 के लिए भारत की ऑफिशियल एंट्री के तौर पर चुना गया है। यह फिल्म 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स में 'बेस्ट इंटरनेशनल फीचर' कैटेगरी में मुकाबला करेगी। इसे विचार के लिए भेजी गई 33 फिल्मों की लिस्ट में से चुना गया है। इस लिस्ट में हिंदी, तेलुगु, तमिल और मराठी फिल्में शामिल थीं। इस घोषणा के बाद से फिल्ममेकर संतोष डावखर भी चर्चा में हैं, जिनका सफर एक प्रोफेसर, प्रोजेक्ट कंसल्टेंट और सोशल एक्टिविस्ट के तौर पर काम करने से जुड़ा रहा है।
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जो लोग सोच रहे हैं कि 'गोंधल' के डायरेक्टर कौन हैं? उन्हें बता दें कि संतोष डावखर ने फिल्ममेकर के तौर पर अपनी पहचान बनाने से पहले अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया है। उनकी ऑफिशियल वेबसाइट 'डावखर फिल्म्स' के अनुसार वह एक प्रोजेक्ट कंसल्टेंट और सोशल एक्टिविस्ट हैं, जिन्होंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत एक प्रोफेसर के तौर पर की थी। उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से स्क्रीनप्ले राइटिंग का एक शॉर्ट कोर्स भी किया है।
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उनकी फिल्म बनाने की यात्रा में सामाजिक रूप से अहम विषयों पर काम करना शामिल है। उनकी शुरुआती शॉर्ट फिल्म 'अज्ञात' में क्लासिसिजम को दिखाया गया था और इसे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में चुना गया था, जहां इसने कई पुरस्कार भी जीते। डावखर ने कैशलेस इकॉनमी से जुड़ा एक सरकारी विज्ञापन भी डायरेक्ट किया है।
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इंटरनेशनल फिल्मों और फेस्टिवल के संपर्क में आने से सिनेमा में उनकी दिलचस्पी और बढ़ी। खास तौर पर कान फेस्टिवल में बिताए समय का 'गोंधल' बनाने के उनके फैसले पर गहरा असर पड़ा। फिल्म के बारे में बात करते हुए, ANI से संतोष डावखर ने कहा कि कान में रहने के दौरान वे हर दिन कई फिल्में देखते थे। इस अनुभव ने उन्हें ऐसी फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया, जिसे इंटरनेशनल नजरिए से भी देखा जा सके।
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संतोष डावखर ने 'गोंधल' क्यों बनाई? उन्होंने HT सिटी को बताया कि 'गोंधल' का आइडिया इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में देखी गई चीजों से प्रेरित था। उनके अनुसार वे ऐसी फिल्म बनाना चाहते थे जो भारत की संस्कृति और विरासत को दिखाए, न कि सिर्फ उन विषयों पर फोकस करें, जिन्हें इंटरनेशनल दर्शक आम तौर पर भारतीय सिनेमा से जोड़कर देखते हैं। फिल्ममेकर ने कहा कि वह चाहते थे कि 'गोंधल' को इंटरनेशनल दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाया जाए और उन्हें उम्मीद थी कि यह उस लेवल पर मुकाबला कर पाएगी। फिल्म का नाम पारंपरिक 'गोंधल' रस्म से लिया गया है, जो महाराष्ट्र से जुड़ी एक सांस्कृतिक परंपरा है।
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उन्होंने कहा, 'मेरा मानना ​​है कि एक डायरेक्टर को हर तरह के संघर्ष से गुजरना चाहिए। तभी आप किरदारों को समझ पाते हैं। हां, मैंने बहुत संघर्ष किया है। मेरे बनाए हर किरदार में यह झलकता है और यह बहुत अच्छी बात है, जब अनुभव का पिटारा खुलता है तो बेहतरीन किरदार सामने आते हैं। 'गोंधल' के साथ भी ऐसा ही हुआ है।'
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फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने 99वें एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के तौर पर 'गोंधल' को चुना है। इस फिल्म को 33 सबमिशन में से चुना गया, जिनमें सबसे ज्यादा 14 एंट्री हिंदी फिल्मों की थीं। मराठी, तेलुगु और गुजराती सिनेमा से चार-चार सबमिशन थे, जबकि तीन फिल्में तमिल भाषा की थीं। मलयालम और नागामीज से एक-एक सबमिशन था, और चयन प्रक्रिया में एक मूक फिल्म भी शामिल थी।