जब पानी में उबाल दिया गया था शहजादी जहांआरा का आशिक, इस मुगल बादशाह ने दिया था हुक्म

मुगल दरबार में लंबा वक्त गुजारने वाले इतिहासकार फ्रैंकोइस बर्नियर ने मुगलों के बारे में विस्तार से लिखा है। बर्नियर ने मुगलों के जीवन और उनसे जुड़े कुछ दिलचस्प किस्सों को बयां किया है।
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मुगल दरबार में लंबा वक्त गुजारने वाले इतिहासकार फ्रैंकोइस बर्नियर ने मुगलों के बारे में विस्तार से लिखा है। बर्नियर ने मुगलों के जीवन और उनसे जुड़े कुछ दिलचस्प किस्सों को बयां किया है।
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बकौल बर्नियर, मुगल बादशाह शाहजहां का अपनी बेटी जहांआरा से गहरा लगाव था। शाहजहां अपनी बेटी जहांआरा के आसपास किसी अन्य पुरुष को देखना बर्दाश्त नहीं करता था।
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जहांआरा, शाहजहां और मुमताज की सबसे बड़ी बेटी थी। वह बेहद खूबसूरत थी और बुद्धिमान भी थी। वह अपने पिता की प्रिय थी और दरबार में प्रभावशाली थी। बर्नियर ने लिखा है कि मुगल बादशाह शाहजहां अपनी बेटी जहांआरा के बहुत ही ज्यादा ‘करीब’ था।
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बर्नियर का कहना है कि शाहजहां का जहांआरा के प्रति प्रेम सामान्य पिता-पुत्री के रिश्ते से बढ़कर था। यह बात मुगल दरबार में चर्चा का विषय थी।
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एक बार जहांआरा का एक आशिक उससे मिलने आया। शाहजहां को इसकी भनक लग गई। आशिक को बचाने के लिए जहांआरा ने उसे पानी की देग में छिपा दिया। लेकिन शाहजहां को इसका पता चल गया और उसने देग को गर्म करने का हुक्म दिया, जिससे वह आशिक उसी में उबल गया।
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बर्नियर के मुताबिक, शाहजहां की यह हरकत सिर्फ जलन का नतीजा नहीं थी, बल्कि वह अपनी बेटी पर पूरा नियंत्रण चाहता था। जहांआरा इस घटना से सदमे में थी, लेकिन उसने अपने पिता का विरोध नहीं किया।
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एक ऐसा भी किस्सा सामने आता है कि जहांआरा से शादी की बात करने वाले एक शख्स को शाहजहां ने जहर देकर मार डाला। बर्नियर लिखता है कि शाहजहां अपनी बेटी को किसी और का होने देना नहीं चाहता था। यही वजह है कि जहांआरा के करीब आने वाले हर मर्द को शाहजहां के गुस्से का शिकार होना पड़ता था।
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जहांआरा ने शाहजहां के बुढ़ापे तक उसका बखूबी साथ दिया था। शाहजहां के अंतिम दिनों में भी जहांआरा उसके साथ थी। औरंगजेब की कैद में ताजमहल को देखते हुए शाहजहां ने 22 जनवरी 1966 को दुनिया छोड़ दी थी।