ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे, जब चुन-चुनकर मारे गए थे जैश के आतंकी; तस्वीरों में देखें

आज 7 मई है। पिछले साल इसी दिन भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' की शुरुआत की थी और पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले का बदला लिया था। भारतीय सेना ने इस दिन पाकिस्तान और PoK के 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। इस हमले में भारत ने जैश-ए-मोहम्मद के उन आतंकियों को मार गिराया था, जो सालों से भारत के खिलाफ साजिशें रच रहे थे।

'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत की गई एयर-स्ट्राइक और सटीक मिसाइल हमलों ने न केवल जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के करीबी रिश्तेदारों का सफाया किया, बल्कि दशकों पुराने जख्मों का हिसाब भी चुकता किया।
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आज 7 मई है। पिछले साल इसी दिन भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' की शुरुआत की थी और पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले का बदला लिया था। भारतीय सेना ने इस दिन पाकिस्तान और PoK के 9 आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। इस हमले में भारत ने जैश-ए-मोहम्मद के उन आतंकियों को मार गिराया था, जो सालों से भारत के खिलाफ साजिशें रच रहे थे। 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत की गई एयर-स्ट्राइक और सटीक मिसाइल हमलों ने न केवल जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के करीबी रिश्तेदारों का सफाया किया, बल्कि दशकों पुराने जख्मों का हिसाब भी चुकता किया।
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इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी कामयाबी यूसुफ अजहर उर्फ उस्ताद गौरी का खात्मा था। मसूद अजहर का साला यूसुफ वही आतंकी था, जिसने 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-814 को हाईजैक करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। वह बालाकोट स्थित जैश के आतंकी कैंप का प्रमुख था और उरी, पुलवामा एवं पठानकोट जैसे जघन्य हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था। बहावलपुर में हुए मिसाइल हमले में उसे उसके अंजाम तक पहुंचाया गया।
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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जैश के 18 एकड़ में फैले आतंकी मुख्यालय 'मरकज सुभान अल्लाह' को निशाना बनाया गया। इस स्ट्राइक में जैश के शीर्ष नेता और मसूद अजहर के सबसे बड़े साले हाफिज मोहम्मद जमील और उसके बेटे हमजा जमील को ढेर कर दिया गया। यह केंद्र कट्टरपंथ और आतंक की ट्रेनिंग का सबसे बड़ा अड्डा था।
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भारतीय सेना की इस जांबाज कार्रवाई में जैश के कई अन्य रणनीतिक कमांडर भी मारे गए। जैश के ऑपरेशनल चीफ अब्दुल रऊफ असगर का दत्तक पुत्र और वरिष्ठ कमांडर हुजैफा असगर अल्वी 'ऑपरेशन सिंदूर' में मारा गया। जैश का एक और कुख्यात आतंकी मुहम्मद अब्दुल अजीज मारा गया।
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मुजफ्फराबाद के 'सैयदना बिलाल' कैंप पर हुए हमले में हसन और वकास दोनों मारे गए। हसन जैश के कश्मीर डिवीजन के प्रमुख मुहम्मद असगर खान कश्मीरी का बेटा था, जबकि वकास एक प्रशिक्षित स्नाइपर विशेषज्ञ था। खबरों के मुताबिक, दोनों जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों के लिए घुसपैठ करने की योजनाओं में शामिल थे। ऑपरेशन सिंदूर के तहत किए गए सटीक मिसाइल हमलों में वे मारे गए।