अहोई माता के लिए भोग की थाली में रखें ये चीजें, मां प्रसन्न हो गईं तो मिल जाएगा संतान की निरोगी-दीर्घायु होने का वरदान

अहोई अष्टमी हिंदूओं के प्रमुख पर्वों में से एक है। कहा जाता है कि है कि इस दिन अहोई माता की पूजा और व्रत करने से महिलाओं को संतान सुख-प्राप्ति होती है। वहीं, माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और निरोगी काया की वरदान प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं। पहली बार अहोई अष्टमी व्रत करने वाली महिलाओं के लिए भोग के बारे में विस्तार से जानना बहुत जरूरी है। चलिए जानते हैं इस दिन भोग में माता के लिए क्या बनाना चाहिए, जिससे मां प्रसन्न हो जाए।
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अहोई अष्टमी हिंदूओं के प्रमुख पर्वों में से एक है। कहा जाता है कि है कि इस दिन अहोई माता की पूजा और व्रत करने से महिलाओं को संतान सुख-प्राप्ति होती है। वहीं, माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और निरोगी काया की वरदान प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं। पहली बार अहोई अष्टमी व्रत करने वाली महिलाओं के लिए भोग के बारे में विस्तार से जानना बहुत जरूरी है। चलिए जानते हैं इस दिन भोग में माता के लिए क्या बनाना चाहिए, जिससे मां प्रसन्न हो जाए।
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हिंदू धर्म में महिलाएं शादी के बाद और अपनी संतान के हितों की कामना करते हुए कई व्रत-उपवास करती हैं। इन्ही में से एक व्रत है अहोई अष्टमी का, जो कार्तिक माह में अष्टमी तिथि पर किया जाता है। इस त्योहार को कई जगहों पर अहोई आठे भी कहते हैं। इस तिथि पर व्रत रखकर माताएं संतान के स्वास्थ्य की कामना करती हैं। यह दिन अहोई माता को प्रसन्न करके उनसे मनवांछित वरदान पाने के लिए बेहद शुभ अवसर होता है।
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अहोई माता को प्रिय भोग अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि पूजा थाली में विशेष भोग को शामिल करने से अहोई माता प्रसन्न होती हैं। ऐसे में अहोई माता को अपनी पाक कला के माध्यम से प्रसन्न करने का अवसर हाथ से जाने ना दें। वहीं, जब भोग अर्पित करना ही है, तो क्यों ना माता अहोई कि पसंद का ही किया जाए? चलिए जानते हैं किन चीजों का भोग लगाना चाहिए।
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कढ़ी और चावल: अहोई अष्टमी के व्रत में अहोई माता को अलग-अलग तरह के भोग अर्पित किए जाते हैं। कहा जाता है कि अहोई माता को सादा और सात्विक भोजन ज्यादा प्रिय है। मान्यता है कि इस दिन उन्हें कढ़ी-चावल का भोग लगाना चाहिए। इसे संतान के जीवन में सादगी और शांति बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है।
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सात प्रकार के अनाज: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अहोई माता की पूजा में गेहूं, चावल, मूंग, मसूर, जौ, चना और तिल जैसे 7 तरह के अनाज चढ़ाने की परंपरा है। यह भोग संतान के जीवन में संतुलन बनाए रखने के प्रतीक के रूप में अहोई माता को अर्पित किया जाता है।
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दूध से बने मिष्ठान: अहोई माता को दूध और दूध से बनी चीजों का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है। यह भोग पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक है। रसगुल्ला, खीर या रस मलाई जैसे मिष्ठान्न अहोई माता के भोग की थाली में रख सकते हैं।
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गेहूं और सूजी से बने व्यंजन: भोग में अहोई माता को गेहूं से बनी चीजें अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। आप उन्हें हलवा और पूरी बनाकर चढ़ाएं। अहोई माता के भोग के लिए गुलगुले जरूर बनाए, यह उनका प्रिय पकवान है। ऐसा कहा जाता है कि यह भोग समृद्धि और मेहनत से सफलता पाने का प्रतीक है।
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मीठे पानी और जल से भरा कलश: अहोई अष्टमी की पूजा में माता के सामने जल से भरा कलश और मीठा पानी रखा जाता है। मान्यता है कि ये भी मां के भोग का ही हिस्सा होता है। जो जीवन में पवित्रता, समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है।
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सिंघाड़ा जरूर करें शामिल: अहोई माता को भोग में सिंघाड़ा जरूर अर्पित करना चाहिए। मान्यता है कि पूजा में सिंघाड़ा चढ़ाने से संतान की उम्र लंबी होती है और जीवन में कोई बड़ी बाधा नहीं आती।
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माता को इन फलों का लगाएं भोग: अहोई माता को फलों की भोग की थाली में अनार फल जरूर रखें। यह संतान की लंबी उम्र और निरोगी जीवन के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा आप केला, सेब और मौसमी फल भी अर्पित कर सकते हैं।