खूबसूरती बढ़ाने वाले आर्टिफिशियल प्लांट बन सकते हैं वास्तु दोष की वजह, घर में नकली पौधे रखने से पहले जान लें नियम

वास्तु में जीवित पौधों को सकारात्मकता और प्राकृतिक ऊर्जा से बताया है, जबकि आर्टिफिशियल प्लांट्स सजावट का साधन है। इन्हें घर में रखना गलत नहीं, लेकिन इनकी जगह महत्वपूर्ण मानी है। जानिए आर्टिफिशियल प्लांट्स से जुड़े वास्तु और फेंगशुई के जरूरी नियम।

घर को खूबसूरत और हरा-भरा दिखाने के लिए आर्टिफिशियल प्लांट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इन्हें पानी, धूप और नियमित देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती। यही वजह है कि व्यस्त जीवनशैली में लोग इन्हें सजावट का आसान विकल्प मानते हैं। हालांकि, वास्तु शास्त्र और फेंगशुई की मान्यताओं में पौधों को केवल सजावट नहीं, बल्कि घर के वातावरण और ऊर्जा से भी जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में नकली पौधे घर में रखने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
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घर को खूबसूरत और हरा-भरा दिखाने के लिए आर्टिफिशियल प्लांट्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इन्हें पानी, धूप और नियमित देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती। यही वजह है कि व्यस्त जीवनशैली में लोग इन्हें सजावट का आसान विकल्प मानते हैं। हालांकि, वास्तु शास्त्र और फेंगशुई की मान्यताओं में पौधों को केवल सजावट नहीं, बल्कि घर के वातावरण और ऊर्जा से भी जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में नकली पौधे घर में रखने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
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आज की व्यस्त दिनचर्या में प्राकृतिक पौधों की देखभाल के लिए समय निकालना कई लोगों के लिए मुश्किल होता है। पौधों को नियमित पानी देने से लेकर उन्हें पर्याप्त धूप और सही देखभाल देने तक कई चीजों का ध्यान रखना पड़ता है। ऐसे में आर्टिफिशियल प्लांट घर की सजावट के लिए सुविधाजनक विकल्प बन गए हैं। ये लंबे समय तक वैसे ही बने रहते हैं और घर को हरा-भरा लुक देते हैं।
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वास्तु शास्त्र में जीवित पौधों को घर में सकारात्मक ऊर्जा और जीवंतता से जोड़कर देखा जाता है। प्राकृतिक पौधे प्रकृति के करीब होने के कारण पंचमहाभूतों के संतुलन का प्रतीक माने जाते हैं। इसके विपरीत कृत्रिम पौधों में जीवन नहीं होता। इसलिए वास्तु की मान्यताओं के अनुसार इन्हें असली पौधों का विकल्प नहीं माना जाता।
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फेंगशुई के अनुसार जीवित पौधे घर में ऊर्जा के प्रवाह को सक्रिय करने में सहायक माने जाते हैं। वहीं आर्टिफिशियल प्लांट्स को मुख्य रूप से सजावट से जोड़ा जाता है। अगर नकली पौधे साफ-सुथरे और प्राकृतिक दिखने वाले हों तो वे घर के माहौल को सुंदर और खुशनुमा बना सकते हैं। हालांकि, उनसे जीवित पौधों जैसी ऊर्जा की उम्मीद नहीं की जाती।
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आर्टिफिशियल प्लांट्स को ड्रॉइंग रूम, लिविंग एरिया, ऑफिस या प्रवेश द्वार के आसपास सजावट के लिए रखा जा सकता है। इससे घर का लुक बेहतर किया जा सकता है। लेकिन पूजा स्थल के मामले में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। भगवान के पास कृत्रिम फूल या पौधे रखने के बजाय ताजे फूलों को प्राथमिकता देना अधिक शुभ माना जाता है।
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नकली पौधे खरीदते समय उनके रंग और डिजाइन का भी ध्यान रखना चाहिए। बहुत ज्यादा चमकीले, भड़कीले या कृत्रिम नजर आने वाले पौधे घर की सजावट का आकर्षण कम कर सकते हैं। प्राकृतिक रंग और असली पौधे जैसा लुक देने वाले आर्टिफिशियल प्लांट बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
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आर्टिफिशियल प्लांट्स को लंबे समय तक इस्तेमाल करने का मतलब यह नहीं है कि उनकी सफाई की जरूरत नहीं है। धूल से भरे, टूटे या खराब हो चुके कृत्रिम पौधों को घर में रखने से बचना चाहिए। वास्तु की मान्यता में ऐसी चीजों को उपेक्षा और नकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए इनकी समय-समय पर सफाई करते रहें और खराब होने पर इन्हें हटा दें।
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अगर व्यस्तता के कारण प्राकृतिक पौधों की देखभाल संभव नहीं है तो आर्टिफिशियल प्लांट्स को सजावट के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन यदि जगह और समय हो तो घर में कम से कम एक-दो जीवित पौधे जरूर रखें। तुलसी, स्नेक प्लांट, जेड प्लांट और मनी प्लांट जैसे पौधे घर में प्राकृतिक हरियाली बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। इस तरह सजावट के लिए नकली पौधों और प्रकृति की जीवंतता के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।