ब्रह्मा जी के मन से उत्पन्न हुए 10 मानस पुत्र कौन थे? इन्हीं में से एक थे रावण के पितामह

ब्रह्मा जी के मन से उत्पन्न हुए पुत्रों को ब्रह्मा जी का मानस पुत्र या मन की संतान कहा गया। ब्रह्मा जी के 10 मानस पुत्र थे जिन्होंने सृष्टि को आगे बढ़ाने का काम किया, इसी वजह से इन्हें प्रजापति की संज्ञा भी दी जाती है। ब्रह्मा जी के इन्हीं पुत्रों में रावण के पितामह यानि दादा भी शामिल थे। आइए जानते हैं इनके बारे में।
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ब्रह्मा जी के मन से उत्पन्न हुए पुत्रों को ब्रह्मा जी का मानस पुत्र या मन की संतान कहा गया। ब्रह्मा जी के 10 मानस पुत्र थे जिन्होंने सृष्टि को आगे बढ़ाने का काम किया, इसी वजह से इन्हें प्रजापति की संज्ञा भी दी जाती है। ब्रह्मा जी के इन्हीं पुत्रों में रावण के पितामह यानि दादा भी शामिल थे। आइए जानते हैं इनके बारे में।
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मरीचि- ये सप्तऋषियों में से एक थे और इनका विवाह दक्ष पुत्री संभूति से हुआ था। इनके पुत्र ऋषि कश्यप थे। मरीचि को जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर महावीर के पिछले जन्मों से जुड़ा भी माना जाता है। अत्रि- इनका विवाह अनुसूया से हुआ था, जिन्होंने त्रिदेवों को नवजात शिशु बनाकर स्तनपान करवाया था। अंगिरस- सप्तऋषियों में अंगिरस ऋषि को वेदों की शिक्षा प्राप्त करने वाला प्रथम ऋषि माना जाता है।
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पुलह- ऋषि पुलह ने अपने पिता ब्रह्मा का साथ ब्रह्मांड का विस्तार करने में दिया था। पुलस्त्य- ये महर्षि विश्रवा के पिता थे और रावण के पितामह यानि दादा जी। इन्हें पुराणों के ज्ञान को मनुष्यों तक पहुंचाने वाला माना जाता है। क्रतु- ये वो ऋषि हैं जिनके द्वारा पहली बार वेदों का विभाजन किया गया था।
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वशिष्ठ- गुरु वशिष्ठ का नाम काफी प्रसिद्ध है क्योंकि ये भगवान श्रीराम के कुलगुरु थे। भृगु- ऋषि भृगु ने भृगु संहिता की रचना की थी। इन्हें ज्योतिष के ज्ञान के ज्ञान को आगे बढ़ाने वाला माना जाता है।
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दक्ष- इनका नाम सभी प्रजापतियों में सबसे अधिक प्रसिद्ध और ख्याति प्राप्त है। नारद- ज्ञान और भक्ति का प्रचार करने वाले नारद ऋषि के बारे में ज्यादातर लोग जाते हैं। ये भगवान विष्णु के परम भक्त थे।