Mandir Parikrama Niyam: क्यों लगाई जाती है मंदिर की परिक्रमा? जान लें सही नियम, वरना ये गलतियां शून्य कर देंगी दर्शन का पूरा फल

सनातन धर्म में मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करने के बाद परिक्रमा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मंदिर का गर्भगृह दिव्य और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। जब भक्त श्रद्धा और शांत मन से भगवान की परिक्रमा करता है, तो यह ऊर्जा उसके भीतर प्रवेश करती है और मन को शांति प्रदान करती है। कई लोग अनजाने में परिक्रमा के दौरान ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। यहां जानिए परिक्रमा से जुड़े नियमों के बारे में...
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सनातन धर्म में मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करने के बाद परिक्रमा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मंदिर का गर्भगृह दिव्य और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। जब भक्त श्रद्धा और शांत मन से भगवान की परिक्रमा करता है, तो यह ऊर्जा उसके भीतर प्रवेश करती है और मन को शांति प्रदान करती है। कई लोग अनजाने में परिक्रमा के दौरान ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता। यहां जानिए परिक्रमा से जुड़े नियमों के बारे में...
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मंदिर की परिक्रमा का महत्व: शास्त्रों के अनुसार, परिक्रमा को केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं बल्कि ध्यान और भक्ति का माध्यम माना गया है। ‘प्रदक्षिणा’ शब्द का अर्थ होता है भगवान को अपने दाहिने भाग में रखते हुए आगे बढ़ना। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति का मन एकाग्र होता है और वह सांसारिक चिंताओं से दूर होकर पूरी तरह ईश्वर की भक्ति में लीन हो जाता है।
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भगवान रहें दाहिनी ओर: धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, परिक्रमा करते समय कभी भी भगवान की मूर्ति या गर्भगृह की ओर पीठ नहीं करनी चाहिए। ऐसा करना अनादर माना जाता है। परिक्रमा हमेशा इस तरह करनी चाहिए कि भगवान आपकी दाहिनी तरफ रहें। इससे श्रद्धा और सम्मान की भावना बनी रहती है।
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उल्टी दिशा में न करें परिक्रमा: मंदिर की परिक्रमा हमेशा घड़ी की सुई की दिशा में करनी चाहिए। इसे शुभ माना जाता है। उल्टी दिशा में घूमना धार्मिक दृष्टि से सही नहीं माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम हो सकता है और पूजा का पूरा लाभ नहीं मिलता।
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शिवलिंग की पूरी परिक्रमा: भगवान शिव के मंदिर में परिक्रमा के विशेष नियम बताए गए हैं। शिवलिंग की जलधारी को लांघना वर्जित माना गया है, इसलिए शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती। भक्तों को आधी परिक्रमा करके वापस लौटने की सलाह दी जाती है।
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शांत मन: परिक्रमा करते समय बातचीत करना, मोबाइल चलाना या जल्दबाजी करना उचित नहीं माना जाता। यह समय पूरी श्रद्धा और ध्यान के साथ भगवान का स्मरण करने का होता है। शास्त्रों में परिक्रमा के दौरान इस श्लोक का जाप भी शुभ बताया गया है — "यानि कानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च। तानि सर्वाणि नश्यन्ति प्रदक्षिण्यां पदे पदे।।"