बप्पा की पूजा में दूब घास चढ़ाने का है विशेष महत्व, ये है गणपति को दूर्वा अर्पित करने का सही तरीका

गणपति पूजा में दूर्वा चढ़ाने की परंपरा है। इसे चढ़ाने के कुछ खास नियम बताए हैं, जिनका ध्यान रखकर विधि-विधान से पूजा पूरी की जा सकती है। गणेश चतुर्थी या किसी भी शुभ मौके पर बप्पा को कैसे दूर्वा अर्पित करना चाहिए? गणेश पूजा का ये नियम जरूर जान लें।

गणेश चतुर्थी समेत बप्पा की पूजा में कई चीजों का विशेष महत्व होता है। वहीं, गणपति पूजन में दूर्वा यानी दूब घास का विशेष स्थान है। मान्यताओं के अनुसार, दूर्वा गणपति को बेहद प्रिय है और इसे श्रद्धा से अर्पित करने से बप्पा की कृपा मिलती है। ऐसे में गणेश चतुर्थी समेत किसी भी शुभ मौके पर गणपति की पूजा करते हैं, तो जान लें कि दूर्वा कैसी होनी चाहिए।
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गणेश चतुर्थी समेत बप्पा की पूजा में कई चीजों का विशेष महत्व होता है। वहीं, गणपति पूजन में दूर्वा यानी दूब घास का विशेष स्थान है। मान्यताओं के अनुसार, दूर्वा गणपति को बेहद प्रिय है और इसे श्रद्धा से अर्पित करने से बप्पा की कृपा मिलती है। ऐसे में गणेश चतुर्थी समेत किसी भी शुभ मौके पर गणपति की पूजा करते हैं, तो जान लें कि दूर्वा कैसी होनी चाहिए।
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गणपति पूजा में दूर्वा चढ़ाने के कुछ खास नियम बताए हैं, जिनका ध्यान रखकर विधि-विधान से पूजा पूरी की जा सकती है। गणेश चतुर्थी या किसी भी शुभ मौके पर बप्पा को कैसे दूर्वा अर्पित करना चाहिए? यहां जानिए
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धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। पूजा में मोदक के साथ दूर्वा अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता है कि सच्चे मन से गणपति की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि आती है। कुछ परंपराओं में 108 दूर्वा से गणपति का अभिषेक करने को भी विशेष फलदायी माना गया है।
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गणपति को अर्पित करने के लिए दूर्वा साफ, हरी और ताजी होनी चाहिए। पूजा से पहले इसे साफ पानी या गंगाजल से धो लें। ऐसी दूर्वा लेना शुभ माना जाता है, जिसके आगे तीन या पांच पत्तियां यानी कोपलें हों।
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दूर्वा अर्पित करने के लिए 21 दूर्वा को एक साथ बांधकर गांठ या छोटा गुच्छा तैयार किया जाता है। इसके बाद ऐसी 21 गांठें गणेश जी को अर्पित करने की परंपरा बताई गई है। इन गांठों को गणपति के चरणों में रखने के बजाय उनके मस्तक पर अर्पित किया जाता है।
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दूर्वा चढ़ाते समय "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके साथ भगवान गणेश को फूल, अक्षत, सिंदूर और मोदक भी अर्पित करें। पूजा पूरी होने के बाद गणपति बप्पा की आरती करें और सुख-समृद्धि के साथ अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करें।
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हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित प्रमुख पर्वों में से एक है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से गणेश उत्सव की शुरुआत होती है और अनंत चतुर्दशी पर इसका समापन होता है। इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 से शुरू होगी। इस दौरान भक्त घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना करके श्रद्धा से उनकी पूजा करते हैं।