गणेश चतुर्थी की पूजा में जरूर करें 3 वास्तु नियमों का पालन, वरना अधूरी रह जाएगी पूजा

गणेश चतुर्थी की पूजा करते समय और गणेश जी को घर में स्थापित करते समय आपको 3 वास्तु नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए। आज इन्हीं नियमों के बारे में हम आपको जानकारी देंगे।

गणेश चतुर्थी का पावन त्योहार 14 सितंबर को है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और गणेश जी की पूजा करते हैं। साथ ही कई लोगों के द्वारा इस दिन गणेश जी की स्थापना भी घर में की जाती है। इस दिन पूजा के दौरान कुछ वास्तु नियमों का पालन जरूर करना चाहिए नहीं तो पूजा अधूरी रह सकती है। आइए जान लेते हैं इन उपायों के बारे में।
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गणेश चतुर्थी का पावन त्योहार 14 सितंबर को है। इस दिन लोग व्रत रखते हैं और गणेश जी की पूजा करते हैं। साथ ही कई लोगों के द्वारा इस दिन गणेश जी की स्थापना भी घर में की जाती है। इस दिन पूजा के दौरान कुछ वास्तु नियमों का पालन जरूर करना चाहिए नहीं तो पूजा अधूरी रह सकती है। आइए जान लेते हैं इन उपायों के बारे में।
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गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी की मूर्ति को घर में स्थापित करने से पहले आपको यह जान लेना चाहिए कि मूर्ति में सूंड बाईं ओर को मुड़ी होनी चाहिए। बाईं ओर को मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी के रूप को वक्रतुंड कहा जाता है और ये भगवान गणेश का शुभ स्वरूप है। वास्तु के अनुसार ऐसी मूर्ति को स्थापित करने से और इसकी पूजा करने से शुभ फल आपको मिल सकते हैं। वहीं वास्तु के अनुसार गणेश जी की सूंड का दाईं ओर को मुड़ा होना गृहस्थ लोगों के लिए अच्छा नहीं होता क्योंकि ऐसे गणेश जी की पूजा करने के विधान कठोर हैं।
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वास्तु के अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा करने से पहले इस बात का भी ख्याल रखें कि गणेश जी की प्रतिमा मिट्टी से बनी हो। प्लास्टिक आदि की मूर्तियां घर में स्थापित नहीं करनी चाहिए वरना सुखद परिणाम आपको पूजा के बाद भी प्राप्त नहीं होंगे।
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गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी की पूजा करने के लिए आपको सही दिशा का चुनाव भी जरूर करना चाहिए। गणेश जी की मूर्ति को उत्तर-पूर्व दिशा में आपको स्थापित करना चाहिए। इस दिशा को ईशान कोण भी कहा जाता है। इस दिशा में गणेश प्रतिमा को स्थापित करने से आपको शुभ परिणाम मिल सकते हैं। इसके साथ ही ख्याल रखें कि गणेश जी की पीठ आपके मुख्य द्वार की ओर न हो।