Balcony Vastu: कैसी होनी चाहिए घर की बालकनी? वास्तु के इन नियमों का रखेंगे ध्यान तो घर में बनी रहेगी सुख-समृद्धि

आजकल लगभग हर घर में बालकनी बनाई जाती है, ताकि घर में ताजी हवा और प्राकृतिक धूप आ सके। बालकनी घर का ऐसा हिस्सा है जहां दिनभर की भागदौड़ से थोड़ा समय निकालकर लोग आराम से बैठकर सुबह-शाम की चाय पीते हैं, पौधे लगाते हैं और सुकून के पल बिताते हैं। लेकिन कई बार बालकनी बनवाते समय या वहां पौधे और फर्नीचर रखते समय लोग कुछ छोटी-छोटी गलतियां कर देते हैं।
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आजकल लगभग हर घर में बालकनी बनाई जाती है, ताकि घर में ताजी हवा और प्राकृतिक धूप आ सके। बालकनी घर का ऐसा हिस्सा है जहां दिनभर की भागदौड़ से थोड़ा समय निकालकर लोग आराम से बैठकर सुबह-शाम की चाय पीते हैं, पौधे लगाते हैं और सुकून के पल बिताते हैं। लेकिन कई बार बालकनी बनवाते समय या वहां पौधे और फर्नीचर रखते समय लोग कुछ छोटी-छोटी गलतियां कर देते हैं।
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अगर बालकनी सही दिशा और सही तरीके से न बनी हो तो इससे घर में वास्तु दोष पैदा हो सकता है। इसलिए बालकनी की दिशा, उसकी छत और उसमें रखे सामान का भी वास्तु के नियमों के अनुसार होना जरूरी माना जाता है। सही तरीके से बनी बालकनी घर में सकारात्मक ऊर्जा लाने में मदद करती है और सुख-समृद्धि बनाए रखती है।
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अगर आप बालकनी में कुर्सी, टेबल या अन्य फर्नीचर रखते समय दिशा का भी ध्यान रखें। वास्तु के अनुसार, बालकनी में फर्नीचर दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना बेहतर माना जाता है। साथ ही बालकनी में बहुत ज्यादा भारी सामान रखने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे ऊर्जा का प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
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पौधों से सजी बालकनी बेहद खूबसूरत लगती हैं। वास्तु की माने तो यहां छोटे गमलों वाले पौधे लगाना अच्छा माना जाता है। बहुत बड़े, भारी या जमीन पर फैलने वाले पौधे बालकनी में नहीं लगाने चाहिए। उत्तर-पूर्व दिशा जल तत्व से जुड़ी मानी जाती है, इसलिए यहां चीनी मिट्टी के पौधे या पानी में उगने वाले पौधे भी रखे जा सकते हैं।
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वास्तुशास्त्र के अनुसार घर की बालकनी उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में बनवाना सबसे अच्छा माना जाता है। इन दिशाओं को सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली का प्रतीक माना गया है। उत्तर-पूर्व दिशा में बालकनी है तो घर में ताजी हवा और सूरज की रोशनी आसानी से आती है। घर का वातावरण भी अच्छा रहता है। माना जाता है कि इन दिशाओं में बालकनी होने से आपके सुख और अच्छी सेहत में वृद्धि होती है।
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वास्तु के अनुसार बालकनी की छत मुख्य घर की छत से थोड़ी नीचे होनी चाहिए। इसे शुभ माना जाता है। साथ ही बालकनी की छत को हल्का ढलान वाला बनाना अच्छा माना जाता है। यह ढलान उत्तर-पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। इससे घर में धूप और रोशनी का प्रवेश बेहतर तरीके से होता है और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
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अगर आप अपनी बालकनी में झूला लगवाना पसंद करते हैं तो इसके लिए सही दिशा का चुनाव करें ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। । वास्तु के अनुसार, बालकनी में झूला दक्षिण दिशा में लगाना सही माना जाता है। वहीं, कुर्सियां भी दक्षिण-पश्चिम कोने में रखी जा सकती हैं, ताकि बैठने वाले व्यक्ति का चेहरा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रहे।
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वास्तु के मुताबिक, घर की बालकनी दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना शुभ नहीं माना जाता। इन दिशाओं में बालकनी होने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। अगर घर में पहले से ही इस दिशा में बालकनी बनी है तो उसे कांच की खिड़कियों या दरवाजों से बंद कर दें। इससे वास्तु दोष का प्रभाव कुछ हद तक कम किया जा सकता है।