Ek Saal Mein Kitni Navratri Hoti Hain: एक साल में कितने नवरात्र आते हैं? जानें कितनी बार मनाते हैं शक्ति साधना से जुड़ा ये पर्व

Saal Mein Kitne Navratra Hote Hain: सनातन धर्म में मां भगवती दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है। माना जाता है कि मां अंबे साधक के सभी कष्टों को दूर करके उनकी कामनाओं की पूर्ति करती हैं। इसी कारण शक्ति के उपासकों को नवरात्रि महापर्व का साल भर बेसब्री से इंतजार रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि साल में कितनी आती है? चलिए जानते हैं देवी दुर्गा की आराधना से जुड़ा यह पर्व साल में कितनी बार मनाया जाता है।
1/7 Image Source : india tv
Saal Mein Kitne Navratra Hote Hain: सनातन धर्म में मां भगवती दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है। माना जाता है कि मां अंबे साधक के सभी कष्टों को दूर करके उनकी कामनाओं की पूर्ति करती हैं। इसी कारण शक्ति के उपासकों को नवरात्रि महापर्व का साल भर बेसब्री से इंतजार रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि साल में कितनी आती है? चलिए जानते हैं देवी दुर्गा की आराधना से जुड़ा यह पर्व साल में कितनी बार मनाया जाता है।
2/7 Image Source : india tv
नवरात्रि महापर्व एक साल में 4 बार मनाया जाता है। देवी मां की साधना दो बार प्रकट रूप में और दो बार गुप्त रूप से की जाती है। चैत्र नवरात्रि और आश्विन नवरात्रि बड़ी धूम-धाम से मनाते हैं। वहीं, आषाढ़ और माघ मास में आने वाले नवरात्र गुप्त नवरात्रि कहलाती है। चैत्र नवरात्रि पर नए संवत्सर की शुरुआत होती है। जबकि, शारदीय नवरात्रि को देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर का वध करने (बुराई पर अच्छाई की जीत) के प्रतीक के तौर पर मनाया जाता है।
3/7 Image Source : india tv
चैत्र और आश्विन मास के नौ दिनों में साधक मां अंबे के 9 स्वरूपों: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना करते हैं। आषाढ़ और माघ मास में देवी दुर्गा के 9 स्वरूपों की नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी 10 महाविद्या की साधना अत्यंत ही गुप्त रूप से होती है। इन 10 महाविद्याओं में मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं।
4/7 Image Source : India tv
शीतकालीन नवरात्रि को माघ गुप्त नवरात्रि कहते हैं। यह हिंदू पंचांग के माघ महीने के शुक्ल पक्षमें प्रतिपदा से नवमी तक मनाई जाती है। इसे पौष मास गुप्त नवरात्रि भी कहा जाता है। यह नवरात्रि तंत्र-मंत्र और गुप्त सिद्धियों की प्राप्ति के लिए जानी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान की गई साधना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और साधक को आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
5/7 Image Source : pexels
चैत्र नवरात्रि में भी माता रानी के उपासना की जाती है। यह नवरात्रि भी गृहस्थ साधकों के लिए है। चैत्र नवरात्रि हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है, जो नवमी तिथि पर राम जन्मोत्सव के साथ समाप्त होती है। इन नौ दिनों में साधक व्रत रखकर देवी की पूजा करते हैं। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ देवी मां के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा होती है।
6/7 Image Source : india tv
आषाढ़ नवरात्रि हर साल जून-जुलाई में मनाई जाती है। इसकी शुरुआत आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। आषाढ़ नवरात्रि को भी गुप्त नवरात्र के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, तंत्र मंत्र सीखने वाले साधकों के लिए गुप्त नवरात्रि बेहद महत्वपूर्ण होती है।
7/7 Image Source : india tv
हर साल आश्विन महीने में शारदीय नवरात्रि का महापर्व मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रि आश्विन माह की प्रतिपदा को आरंभ होती है और आश्विन माह की नवमी को समाप्त होती है। दशमी तिथि पर दशहरा पर्व मनाया जाता है और इस दिन रावण दहन किया जाता है। शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।