धार्मिक और मांगलिक कार्यों में क्यों फोड़ा जाता है नारियल? जानें क्या है इसका महत्व

आपने धार्मिक और मांगलिक कार्यों के दौरान पंडित को नारियल की बलि देते देखा होगा। वहीं मंदिरों में जब आप जाते हैं और नारियल मंदिर में चढ़ाते हैं तो पंडित जी नारियल तोड़कर आपको प्रसाद के रूप में वापस देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नारियल की बलि क्यों दी जाती है, इसके पीछे की धार्मिक मान्यता क्या है। अगर नहीं, तो आइए जानते हैं।
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आपने धार्मिक और मांगलिक कार्यों के दौरान पंडित को नारियल की बलि देते देखा होगा। वहीं मंदिरों में जब आप जाते हैं और नारियल मंदिर में चढ़ाते हैं तो पंडित जी नारियल तोड़कर आपको प्रसाद के रूप में वापस देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नारियल की बलि क्यों दी जाती है, इसके पीछे की धार्मिक मान्यता क्या है। अगर नहीं, तो आइए जानते हैं।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारियल को नर का प्रतीक स्वरूप माना जाता है। नारियल के बाहरी भाग पर लगे रेसों को इंसान के बाल माना जाता, बाहरी सख्त हिस्से को खोपड़ी और इसके अंदर के रक्त को रक्त की संज्ञा दी जाती है।
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धार्मिक कार्यों में नारियल की बलि देकर हम ईश्वर के समक्ष अपने अहंकार और आसक्ति को त्यागते हैं। यानि धार्मिक मांगलिक कार्यों में नारियल को तोड़ना भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पुराने समय में लोग मानव बलि भी देते थे, इसी प्रथा को खत्म करने के लिए शायद नारियल की बलि देना प्रारंभ हुआ।
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इसके साथ ही नारियल को श्री गणेश, माता लक्ष्मी और विष्णु भगवान का प्रिय माना जाता है। इसलिए नारियल की बलि देकर हम इन सभी देवी-देवताओं को प्रसन्न भी करते हैं। नारियल के जल को देवी-देवताओं के पैरों में अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है।
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नारियल को माता लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है और इसीलिए इसे श्रीफल भी कहते हैं। ऐसे में नारियल शुभता और संपन्नता का प्रतीक भी बन जाता है। इसलिए भी धार्मिक-मांगलिक कार्यों के दौरान नारियल की बलि देना बेहदु सकारात्मक और शुभ फलदायक होता है।