पंचमुखी रुद्राक्ष 2 राशियों के लिए होता है वरदान के समान, पहनते ही दिखते हैं सकारात्मक बदलाव

पंचमुखी रुद्राक्ष के स्वामी देव गुरु बृहस्पति हैं। इसलिए इस रुद्राक्ष को धारण करना बेहद शुभ माना जाता है। इसे रुद्राक्ष को धारण करने से मन शांत रहता है और बौद्धिक कौशल भी बढ़ता है। राशिचक्र की दो राशियों के लिए यह रुद्राक्ष वरदान की समान माना गया है। हालांकि, रुद्राक्ष नियमों के अनुसार ही धारण करना चाहिए। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि रुद्राक्ष किन राशियों के लिए शुभ होता है और किसी विधि से इसे धारण किया जाना चाहिए।
1/5 Image Source : Unsplash
पंचमुखी रुद्राक्ष के स्वामी देव गुरु बृहस्पति हैं। इसलिए इस रुद्राक्ष को धारण करना बेहद शुभ माना जाता है। इसे रुद्राक्ष को धारण करने से मन शांत रहता है और बौद्धिक कौशल भी बढ़ता है। राशिचक्र की दो राशियों के लिए यह रुद्राक्ष वरदान की समान माना गया है। हालांकि, रुद्राक्ष नियमों के अनुसार ही धारण करना चाहिए। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि रुद्राक्ष किन राशियों के लिए शुभ होता है और किसी विधि से इसे धारण किया जाना चाहिए।
2/5 Image Source : Freepik
धनु राशि- राशिचक्र की नवीं राशि धनु के जातकों के लिए रुद्राक्ष धारण करना बेहद शुभ माना गया है क्योंकि गुरु इस राशि के स्वामी है। ऐसे में ये लोग रुद्राक्ष धारण करते हैं तो इनको करियर से लेकर पारिवारिक जीवन तक हर क्षेत्र में शुभ परिणाम मिलते हैं। रुद्राक्ष धारण करने से इनकी याददाश्त भी तेज होती है और एकाग्रता भी बढ़ती है।
3/5 Image Source : Freepik
मीन राशि- इस राशि के जातकों के लिए भी रुद्राक्ष शुभ होता है क्योंकि गुरु इनकी राशि के स्वामी भी हैं। रुद्राक्ष धारण करने से इनको सफलता और आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। इसके साथ ही भावनात्मक रूप से भी ये लोग मजबूत होते हैं।
4/5 Image Source : Unsplash
हालांकि इन दोनों राशियों को रुद्राक्ष पहनने के बाद कुछ बातों का ध्यान भी अवश्य रखना चाहिए। जैसे रुद्राक्ष धारण करने के बाद मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। स्वयं और घर की शुद्धता का भी विशेष ध्यान देना चाहिए तभी रुद्राक्ष शुभ फल प्रदान करता है।
5/5 Image Source : Freepik
वहीं धनु और मीन को रुद्राक्ष गुरुवार के दिन गुरु के नक्षत्र में ही धारण करना चाहिए। धारण करने से पहले गंगाजल या गाय के दूध से इसे शुद्ध करना चाहिए। इसके बाद गुरु ग्रह के मंत्र 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' का ग्यारह बार जप करना चाहिए और उसके बाद यह रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।