तीसरे, छठे और एकादश भाव में बैठा केतु बना सकता है रंक को राजा, आपकी कुंडली के किस भाव में है स्थित?

केतु भले ही एक क्रूर ग्रह है लेकिन कुंडली के कुछ भावों में इसका बैठना बेहद शुभ माना जाता। खासकर कुंडली के तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में केतु बेहद शुभ परिणाम आपको दे सकता है। आइए अब जान लेते हैं कि इन 3 भावों में केतु के क्या परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
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केतु भले ही एक क्रूर ग्रह है लेकिन कुंडली के कुछ भावों में इसका बैठना बेहद शुभ माना जाता। खासकर कुंडली के तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में केतु बेहद शुभ परिणाम आपको दे सकता है। आइए अब जान लेते हैं कि इन 3 भावों में केतु के क्या परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
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तृतीय भाव- कुंडली के तृतीय भाव को साहस और पराक्रम का कारक माना जाता है। इस भाव में बैठा केतु व्यक्ति को निडर और साहसी बनाता है। ऐसे लोग अपने दम पर करियर क्षेत्र में उन्नति पाते हैं। इसके साथ ही अध्यात्मिक विषयों में भी व्यक्ति को रुचि हो सकती है। गूढ़ विषयों जैसे-ज्योतिष, विज्ञान आदि में ऐसे लोगों की अच्छा पकड़ हो सकती है।
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षष्ठम भाव- कुंडली के छठे भाव में बैठा केतु दुश्मनों पर विजय दिलाता है। ऐसे लोगों को अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में जबरदस्त सफलता मिलती है। इनकी इच्छाशक्ति मजबूत होती है इसलिए सफलता की सीढ़ियों पर ये जरूर चढ़ सकते हैं।
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एकादश भाव- कुंडली का एकादश भाव, लाभ का भाव भी कहा जाता है। यहां बैठा केतु व्यक्ति को करियर क्षेत्र में लाभ दिला सकता है। ऐसे लोग महत्वाकांक्षी होते हैं और अपने सपनों को पूरा करने के लिए जी तोड़ मेहनत करते हैं। इनका संपर्क बहुत अच्छे होते हैं और कार्यक्षेत्र में इनको मान-सम्मान की भी प्राप्ति होती है।
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इन तीन भावों के अलावा केतु अष्टम, दशम और द्वादश में भी अच्छे परिणाम दे सकता है। कुंडली के बाकी घरों में केतु के फल मिश्रित होते हैं।