आंखों में आंसू और दिल में दुआएं, सुपुर्द-ए-खाक हुए खामेनेई, अंतिम विदाई में रो पड़ा ईरान; Photos

सैयद अली ख़ामेनेई 28 फरवरी को इज़राइली हमले में मारे गए थे। वह 1989 में रुहुल्लाह ख़ुमैनी की मौत के बाद, ईरान के सुप्रीम लीडर बने थे। ईरान की सरकार ने दावा किया कि पिछले पांच दिनों में ख़ामेनेई के Funeral में दो करोड़ 37 लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। 80 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
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सैयद अली ख़ामेनेई 28 फरवरी को इज़राइली हमले में मारे गए थे। वह 1989 में रुहुल्लाह ख़ुमैनी की मौत के बाद, ईरान के सुप्रीम लीडर बने थे। ईरान की सरकार ने दावा किया कि पिछले पांच दिनों में ख़ामेनेई के Funeral में दो करोड़ 37 लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। 80 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
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मिडिल ईस्ट में जंग में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई को अब से कुछ देर पहले सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। खामेनेई को उनके पुश्तैनी शहर मशहद में इमाम रज़ा के मकबरे के पास दफनाया गया।
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रोती हुई महिलाओं की ये तस्वीरें बताती हैं कि खामेनेई ईरान और मुस्लिम समाज के एक बड़े वर्ग के लिए कितने महत्वपूर्ण माने जाते थे।
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कर्बला में इमाम हुसैन दरगाह पर भीड़ के बीच से ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का ताबूत ले जाते समय शोक मनाने वालों ने प्रार्थना की।
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खामेनेई सिर्फ Head of The State नहीं थे, वो ईरान के सबसे बड़े धार्मिक नेता भी थे। उनकी मौत से पहले फरवरी तक ये लगता था कि ईरान में जनता का एक बड़ा वर्ग खामेनेई की सरकार से परेशान है, नाराज है। अमेरिका को लगा था कि खामेनेई को खत्म करने से ईरान के लोग खुश होंगे लेकिन जिस तरह से खामेनेई और उनके परिवार को उड़ाया गया उसने ईरान की जनता को अमेरिका के खिलाफ एकजुट कर दिया।
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खामेनेई की मौत हुए 4 महीने से ज्यादा हो गए। इस दौरान अमेरिका की बमबारी ने ईरान को तबाह कर दिया लेकिन खामेनेई के जनाजे में लोगों की भारी भीड़ ने साबित कर दिया कि लोग अपने सुप्रीम लीडर को भूले नहीं हैं।
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अपने पूर्व सुप्रीम लीडर को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। आंखों में आंसू, दिल में दुआएं और हाथों में झंडे लिए उमड़ी भीड़ यह दर्शाती है कि अली खामनेई का लोगों के बीच कितना प्रभाव और सम्मान था।
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आज उनका शव कड़ी सुरक्षा के बीच इराक़ के नजफ़ शहर से मशहद लाया गया। सैयद अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में आज भी लाखों लोग शामिल हुए। मशहद शहर की सड़कों और गलियों में पैर रखने की जगह नहीं थी।
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अब एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि जिंदा खामेनेई अमेरिका के लिए फायदे का सौदा था लेकिन उन्हें मारकर भी अमेरिका ईरान पर कब्जा नहीं कर सका। युद्ध में billions of dollars का नुकसान हुआ, वो अलग।
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रोती हुई महिलाएं और खामेनेई के जनाजे में लोगों की भारी भीड़ ने साबित कर दिया कि लोग अपने सुप्रीम लीडर को भूले नहीं हैं।
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आज ऐसा लगा मानो पूरा ईरान सड़कों पर उतर आया हो। पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली हुसैनी खामनेई की अंतिम यात्रा में लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
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ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को आज उनके गृहनगर मशहद में दफनाया गया। इसके साथ ही ईरान और इराक में 6 दिनों तक चले खामेनेई की अंतिम विदाई के कार्यक्रम समाप्त हो गए।