दुनिया का एक मात्र नेता जो प्लेन से नहीं, ट्रेन से चलता है...चीन जाने के बाद जानें क्यों हो रही तेज चर्चा?

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन दुनिया के एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो प्लेन से नहीं बल्कि ट्रेन से चलते हैं। वह चीन के एससीओ सम्मेलन में भी अपनी पूरी ट्रेन लेकर पहुंचे।
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उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन दुनिया के एकमात्र ऐसे नेता हैं, जो प्लेन से नहीं बल्कि ट्रेन से चलते हैं। वह चीन के एससीओ सम्मेलन में भी अपनी पूरी ट्रेन लेकर पहुंचे।
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किम जोंग जिस भी किसी देश में जाते हैं, वहां वह अपनी पूरी ट्रेन लेकर जाते हैं। चीन में उनका ट्रेन से जाना और अन्य गतिविधियों ने एक बार फिर किम जोंग को बेहद सुर्खियों में ला दिया है।
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चीन के एससीओ शिखर सम्मेलन के बाद किम जोंग उन ने रूस के राष्ट्रपति और अपने जिगरी दोस्त व्लादिमिर पुतिन से मुलाकात की।
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रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करने के लिए वह उन्हीं की कार से मीटिंग स्थल गए। इससे इन दोनों नेताओं की जिगरी दोस्ती का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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पुतिन के साथ बीजिंग में किम जोंग की द्विपक्षीय वार्ता यूक्रेन युद्ध के परिप्रेक्ष्य में ही नहीं, बल्कि उनकी अपनी कुछ निजी वजहों से भी बेहद चर्चा में है।
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आपको जानकर हैरानी होगी कि पुतिन के साथ मीटिंग के बाद किम जोंग के स्टाफ ने बैठक स्थल के सारे डीएनए और फिंगर प्रिंट को रगड़-रगड़ कर मिटा दिया। इससे दुनिया हैरान है।
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चीन में वह रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के साथ जुगलबंदी करते दिखे। इस तिकड़ी ने अमेरिका को चिंतित कर दिया है।
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अमेरिका के लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान का एकजुट होना है। अमेरिका के भारी टैरिफ के बाद अब भारत भी चीन के करीब हो गया है।
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जापान को द्वितीय विश्वयुद्ध में मात देने के 80वें वार्षिक समारोह के जश्न में इन विश्व नेताओं को शामिल कराया। इसमें पुतिन और किम की मौजूदगी के अलावा ईरान के राष्ट्रपति डा. मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिका को और भी ज्यादा झटका दिया। अब यह ग्रुप फिर से सक्रिय हो चुका है।
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उत्तर कोरिया अपने कुख्यात परमाणु मिसाइलों और घातक हथियारों के लिए जाना जाता है। कथित तौर पर उत्तर कोरिया ने रूस को 10 हजार से अधिक सैनिक और विभिन्न प्रकार के हथियारों की सप्लाई की थी। किम जोंग की अमेरिका से कट्टर दुश्मनी है। ऐसे में चीन और रूस के राष्ट्रपतियों से यह दोस्ती ट्रंप के लिए बड़ी रणनीतिक हार भी है।