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हरियाणा के फरीदाबाद में आया 2.9 तीव्रता का हल्का भूकंप, तेज गड़गड़ाहट और धमाके की आवाज क्यों सुनाई दी?

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में 2.9 की तीव्रता का भूकंप आया, लेकिन लोगों ने बताया कि तेज गड़गड़ाहट के साथ धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। इतनी कम तीव्रता के भूकंप से तेज धमाके की आवाज क्यों सुनाई दी?

फरीदाबाद में भूकंप- India TV Hindi
फरीदाबाद में भूकंप

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में गुरुवार (5 नवंबर 2026) की शाम को रिक्टर पैमाने पर 2.9 तीव्रता का हल्का भूकंप आया, लेकिन लोगों ने बताया कि तेज गड़गड़ाहट और धमाके जैसी आवाज़ सुनाई दी। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, यह भूकंप शाम 6:33 बजे (IST) आया था औरइसका केंद्र अक्षांश 28.386° उत्तर और देशांतर 77.258° पूर्व पर स्थित था। यह भूकंप ज़मीन से केवल 5 किमी की कम गहराई पर आया था।

इतनी कम तीव्रता, फिर क्यों जोर से हिली धरती

  • भूकंप की तीव्रता अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद,लोगों को यह एक तेज़ गड़गड़ाहट या धमाके जैसी आवाज़ के रूप में क्यों महसूस हुआ? 
  • यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, छोटे और कम गहराई वाले भूकंप उच्च-आवृत्ति (high-frequency) वाले कंपन पैदा कर सकते हैं।
  • ये कंपन सतह तक पहुंचते हैं और तेज़ गड़गड़ाहट जैसी आवाज़ें पैदा करते हैं। ये आवाज़ें दूर से सुनाई देने वाली गोलीबारी, बादलों की गड़गड़ाहट या धमाकों जैसी लग सकती हैं।
  • USGS के मुताबिक कई बार, भूकंप के ज़ोरदार झटके महसूस होने से पहले ही ये आवाज़ें सुनाई दे सकती हैं; ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तेज़ गति से चलने वाली P-तरंगें (P-waves), धीमी गति से चलने वाली S-तरंगों (S-waves) से पहले सतह तक पहुंच जाती हैं।
  • भूकंप की गहराई इस बात में अहम भूमिका निभाती है कि सतह पर उसकी ऊर्जा किस तरह महसूस होगी।
  • जब कोई भूकंप सतह के नज़दीक आता है, तो उसकी भूकंपीय तरंगों (seismic waves) को ज़मीन की सतह तक पहुंचने के लिए बहुत कम दूरी तय करनी पड़ती है।
  • इसका मतलब यह है कि कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी कंपन (high-frequency vibrations) इतनी ऊर्जा बनाए रख सकते हैं कि उनसे सुनाई देने वाली गड़गड़ाहट या धमाके जैसी आवाज़ पैदा हो सके।
  • कम तीव्रता वाले भूकंप का मतलब यह नहीं है कि वह पूरी तरह से शांत ही होगा।
  • 'बुलेटिन ऑफ द सिस्मोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ अमेरिका' में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि 2 से 3 तीव्रता वाले भूकंप अपनी शुरुआती 'कंप्रेशनल तरंगों' (compressional waves) के ज़रिए ऐसी आवाज़ें पैदा कर सकते हैं जिन्हें सुना जा सके।
  • लोगों को कैसी आवाज़ सुनाई देगी, यह कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे कि वे भूकंप के केंद्र (epicentre) से कितनी दूर हैं, भूकंप कितनी गहराई पर आया है, वहाँ की भूवैज्ञानिक स्थितियां कैसी हैं, और भूकंपीय तरंगों की फ्रीक्वेंसी क्या है।

इसके विपरीत, जैसे-जैसे भूकंपीय तरंगें (seismic waves) अधिक गहराई और दूरी तय करती हैं, उनकी हाई-फ्रीक्वेंसी ऊर्जा कमज़ोर पड़ने लगती है। इस वजह से, अधिक गहराई पर आने वाले भूकंपों से ज़मीन की सतह पर मौजूद लोगों को वैसी तेज़ या धमाके जैसी आवाज़ सुनाई देने की संभावना कम हो जाती है।