हिसार: सतलोक आश्रम के संचालक संत रामपाल को जमानत मिलने के बाद शुक्रवार शाम हिसार की सेंट्रल जेल (आजाद नगर) से रिहा कर दिया गया। उसकी रिहाई के दौरान पुलिस ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए थे और जेल के बाहर बैरिकेडिंग भी की गई थी। रिहाई के बाद संत रामपाल को 5-6 गाड़ियों के काफिले के साथ जेल से बाहर ले जाया गया। उसके समर्थकों में इस दौरान खासा उत्साह देखने को मिला।
कोर्ट में पूरी हुई रामपाल की जमानत प्रक्रिया
संत रामपाल की जमानत का मामला एडीएसजे गगनदीप की अदालत में चला, जहां उसके समर्थकों द्वारा 5-5 लाख रुपये के बेल बॉन्ड जमा कराए गए। अधिवक्ता महेंद्र नैन ने बताया कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही उनकी रिहाई संभव हो पाई। बता दें कि जिस मामले में जमानत मिली है वह 12 जुलाई 2006 का है, जब रोहतक के करोंथा गांव स्थित आश्रम में हिंसा हुई थी। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी जिसके बाद पुलिस ने संत रामपाल पर हत्या का मामला दर्ज किया था।
अप्रैल 2008 में मिली थी पहली बार जमानत
बता दें कि करीब 22 महीने जेल में रहने के बाद इस मामले में अप्रैल 2008 में उसे जमानत मिल गई थी, जिसके बाद वह हिसार के बरवाला स्थित आश्रम में रहने लगा था। इसी मामले की सुनवाई हिसार की अदालत में चलती रही। जुलाई 2014 में संत रामपाल को अदालत में पेश होना था, लेकिन इस दौरान उसके समर्थकों और वकीलों के बीच टकराव हो गया। इसके बाद वकीलों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने रामपाल को पेश होने के आदेश दिए, लेकिन पेश न होने पर पुलिस को उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया।
गिरफ्तारी से बचने को बनवाई मानव श्रृंखला
गिरफ्तारी से बचने के लिए रामपाल ने बरवाला आश्रम के चारों ओर समर्थकों की मानव श्रृंखला बनवा दी थी। नवंबर 2014 में पुलिस ने आश्रम की घेराबंदी की, जो करीब 14 दिनों तक चली। 18 नवंबर को पुलिस आश्रम में दाखिल हुई, जहां महिलाओं, बच्चों और निजी सुरक्षाकर्मियों के बीच छिपे रामपाल को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान भारी तनाव की स्थिति बनी रही।
रामपाल पर कई मामलों में दर्ज हैं FIR
20 नवंबर 2014 को बरवाला थाने में संत रामपाल और उनके अनुयायियों के खिलाफ हत्या, देशद्रोह सहित कई धाराओं में 5 एफआईआर (नंबर 426, 427, 428, 429 और 430) दर्ज की गई थीं। FIR 429 और 430 (हत्या के मामले) में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने फिलहाल स्थगित कर रखा है। FIR 426 और 427 में उसे हाईकोर्ट से बरी किया जा चुका है। FIR 428 (देशद्रोह) में हाल ही में सशर्त जमानत मिली है। कुल 14 मामलों में से संत रामपाल अब 11 मामलों में राहत पा चुका है।
इंजीनियर से संत बनने तक का सफर
संत रामपाल हरियाणा के सोनीपत जिले के धनाना गांव का रहने वाला है। उसने सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर वर्ष 1995 में रोहतक के करोंथा गांव में सतलोक आश्रम की स्थापना की और ‘नामदान’ देना शुरू किया। इसके बाद वह कबीर पंथी संप्रदाय के प्रमुख के रूप में उभरा। आर्य समाज पर विवादित टिप्पणियों के कारण उसके अनुयायियों और आर्य समाज के लोगों के बीच टकराव भी हुआ था। देशभर में उसके करीब 15 आश्रम हैं, जिनमें से हरियाणा में स्थित भिवानी, सोनीपत (धनाना), रोहतक (करोंथा) और हिसार (बरवाला) प्रमुख हैं। बरवाला आश्रम फिलहाल कोर्ट केस के चलते अटैच संपत्ति है और पिछले 11 साल से वहां पुलिस की निगरानी जारी है। (रिपोर्ट: प्रवीण कुमार)