नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के चुनाव अभी एक साल दूर है लेकिन राजनीति के बड़े दिग्गज अभी से करवट बदलने लगे हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव राष्ट्रीय लोक दल के मुखिया अजित सिंह के साथ बातचीत कर रहे हैं। यह बातचीत चुनाव पूर्व होने वाले संभावित गठबंधन के रूप में देखी जा रही है। इससे पहले यूपी सरकार में मंत्री शिवपाल सिंह अजित सिंह से मिलने उनके आवास पहुंचे थे।
इससे पहले सिंह की बात जेडीयू से भी हुई लेकिन राज्यसभा सीट और पार्टी अध्यक्ष जैसी शर्तों की वजह से बात नहीं बन पाई। सूत्रों के मुताबिक अजित सिंह बीजेपी के भी संपर्क में हैं और कैबिनेट मंत्री जैसे किसी ओहदे के बदले उसके साथ भी जा सकते हैं। हालांकि बीजेपी को यकीन तभी होगा जब अजित सिंह पार्टी के विलय के लिए तैयार हो जाएंगे। ऐसे में जानकार यह भी मान रहे हैं कि मुलायम से मुलाक़ात अजित सिंह की बीजेपी पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक वह सपा से राज्यसभा सीट का भी वादा चाहते हैं, वहीं जेडीयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि 'वह दोनों पुराने साथी है, उनके पार्टी में समझौते को लेकर मैं क्या बोलूं।'
गठबंधन से दोनों दलों को होगा फायदा
सपा और रालोद का गठबंधन हो जाता है तो यह प्रदेश की राजनीति में निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा की ओर से 401 उम्मीदवार मैदान में उतारे गए थे और पार्टी को 224 सीटों के साथ बहुमत हासिल हुआ था।
2012 में पार्टी को कुल मतों के 29.13 प्रतिशत मत मिले थे। रालोद ने इसी चुनाव में 46 सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें से उसके हाथ 9 सीटें लगी थी और उसे कुल वोटों का 2.33 प्रतिशत मिला था। अगर इन दोनों दलों के प्रतिशत जोड़ दिए जाएं तो कुल 31.46 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।
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