A
Hindi News भारत राजनीति अखिलेश यादव और शिवपाल के बीच की दूरियां ख़त्म, चाचा-भतीजे में बन गई बात?

अखिलेश यादव और शिवपाल के बीच की दूरियां ख़त्म, चाचा-भतीजे में बन गई बात?

शिवपाल आगे बढ़े मंच पर खड़े दूसरे लोगों से बात की और फिर अखिलेश ने उन्हें इशारा कर कुर्सी पर बैठने को कहा। इस बीच एक मंच पर अखिलेश और शिवपाल को देखकर समर्थकों का जोश भी दोगुना हो गया।

Akhilesh-touches-uncle-Shivpal-s-feet-seeks-his-blessings-on-Holi- India TV Hindi अखिलेश यादव और शिवपाल के बीच की दूरियां ख़त्म, चाचा-भतीजे में बन गई बात?

नई दिल्ली: क्या शिवपाल सिंह और अखिलेश यादव के बीच की दूरियां अब ख़त्म हो रही हैं? क्या चाचा भतीजे में बात बनने लगी हैं? ये सवाल इसलिए क्योंकि उत्तर प्रदेश के सैफई में एक ऐसी ही तस्वीर दिखी जिसके बाद कुछ इसी तरह के मायने निकाले जा रहे हैं। मौका होली का था और इसी दौरान अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल सिंह यादव के पैर छू लिये। शुक्रवार को होली के मौके पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव मंच पर मौजूद थे। साथ ही समर्थकों और मेहमानों का हुजूम था। तभी एंट्री हुई चाचा शिवपाल सिंह यादव की और मंच पर आते ही अखिलेश ने शिवपाल के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

हालांकि इस दौरान दोनों के बीच कोई बात नहीं हुई बल्कि शिवपाल आगे बढ़े मंच पर खड़े दूसरे लोगों से बात की और फिर अखिलेश ने उन्हें इशारा कर कुर्सी पर बैठने को कहा। इस बीच एक मंच पर अखिलेश और शिवपाल को देखकर समर्थकों का जोश भी दोगुना हो गया। उन्होंने भी नारेबाज़ी शुरू कर दी। इसके बाद मंच पर मौजूद अखिलेश और शिवपाल नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ फूलों की होली खेलने लगे लेकिन फिर शिवपाल सिंह यादव ने माइक थामा उन्होंने अपने भाषण में किसी का नाम तो नहीं लिया लेकिन उनका निशाना किस पर था शायद अंदाज़ा लगाना ज़्यादा मुश्किल भी नहीं था।  

ज़िक्र मनमुटाव और अंदरूनी झगड़े का था। जिक्र उस झगड़े से हुए नुकसान का था और सब जानते हैं कि ये सब कुछ पिछले कुछ दिनों में समाजवादी पार्टी का हिस्सा रहा है। हालांकि इसके बाद अखिलेश ने भी मीडिया से बात की लेकिन पारिवारिक झगड़े पर कुछ नहीं कहा बल्कि सभी को होली की बधाई दी। दरअसल पिछले कुछ महीनों में समाजवादी पार्टी में जो घमासान हुआ वो अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह यादव की तकरार का ही नतीजा था। अंजाम ये हुआ कि ना सिर्फ़ सत्ता हाथ से निकल गई बल्कि पार्टी भी दो धड़ों में बंट गईं। अब 2019 का लोकसभा चुनाव क़रीब है तो ज़रूरत है रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाने की। शायद ये उसी का एक हिस्सा है।

Latest India News