श्रीनगर: गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कश्मीर संकट के समाधान के लिए सरकार के दरवाज़े ही नहीं रौशनदान भी खुले हुए हैं। सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल करने के लिए यहां आए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से बात करने से मना करने वाले न सिर्फ कश्मीरियत बल्कि जम्हूरियत के भी ख़िलाफ़ हैं।
राजनाथ सिंह यहां सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दूसरे दिन मीडिया को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न अंग है और यहां शांति के लिए जो भी बात करना चाहे, सरकार तैयार है। उन्होंने कहा कि सब राज्य में शांति चाहते हैं और पूरा देश यहां के हालात से दुखी है।
राजनाथ ने कहा कि प्रतिनिधि मंडल के कुछ सदस्य अपनी पहल पर ख़ुद हुर्रियत के नेताओं से मिलने गए थे।
उल्लेखनीय है कि चार सांसद, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीआई नेता डी राजा, जदयू नेता शरद यादव और आरजेडी के जयप्रकाश नारायण समूह से अलग हुए और गिलानी से मिलने के लिए उनके आवास पर गए थे जहां वह पिछले 60 दिनों से नजरबंद हैं। वहीं, एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी हुर्रियत कान्फ्रेंस के उदारवादी धड़े के नेता मीरवाइज उमर फाररूक से चश्मा शाही उप जेल में अलग से मिलने के लिए गए थे जहां उन्हें बंद रखा गया है।
गिलानी के आवास के गेट सांसदों के लिए खोले तक नहीं गए जबकि बाहर लोगों ने नारेबाजी की। गिलानी ने उन्हें खिड़की से देखा लेकिन सांसदों से मिलने से इनकार कर दिया। यादव ने कहा, ‘हमारा यह प्रयास यह दिखाने के लिए है कि हम किसी से भी बातचीत के लिए तैयार हैं, चाहे वे मिलने के लिए तैयार हों या नहीं।’ समूह जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक से भी मुलाकात करने के लिए गया जो हुमामा में बीएसएफ शिविर में हिरासत में है। मलिक ने सांसदों से कहा कि दिल्ली आने पर वह उनसे बातचीत करेंगे।
ओवैसी मीरवाइज से अलग से मिलने के लिए गए थे। मीरवाइज ने ओवैसी से संक्षिप्त मुलाकात की जिस दौरान मात्र दुआ सलाम हुई। ओवैसी के असफल प्रयास के बाद येचुरी, यादव, राजा और नारायण वाला एक समूह मीरवाइज से मिलने के लिए गया था और वे उनके साथ 15 मिनट तक रहे।
राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र राज्य सरकार की हर संभव मदद कर रहा है और महबूबा-सरकार हालात को सामान्य बनाने की लगातार कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यहां बातचीत काफी अच्छी रही।
उन्होंने मीडिया से कश्मीर में सामान्य हालात बनाने में वह मदद करने की अपील की।
प्रतिनिधिमंडल यहां पर उस अशांत स्थिति को शांत करने के लिए आया है जो गत आठ जुलाई को हिजबुल आतंकवादी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में व्याप्त है। प्रदर्शनों के कारण उत्पन्न झड़पों में 71 व्यक्तियों की मौत हुई है और सैकड़ों घायल हुए हैं।
सोमवार को प्रतिनिधिमंडल जम्मू जाएगा और कश्मीरी पंडितों और कारोबारियों से हालात पर चर्चा करेगा।
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