नई दिल्ली: दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच चल रही तनातनी और इस संबंध में हाल ही में आए उच्च न्यायालय के फैसले की पृष्ठभूमि में लोकसभा में आज यह मुद्दा उठा और देश की राजधानी में प्रशासनिक मशीनरी के ठप होने के चलते जनता को होने वाली परेशानी का जिक्र किया गया।
भाजपा के डॉ. किरीट सोमैया ने सदन में शून्यकाल के दौरान यह मामला उठाते हुए कहा कि दिल्ली में नेताओं के बीच अहम की लड़ाई छिड़ी है। उनमें यह साबित करने की होड़ लगी है कि मैं बड़ा कि तू बड़ा। सोमैया ने कहा कि उच्च न्यायालय ने पिछले दिनों दिए अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि उप राज्यपाल के पास प्रशासनिक शक्तियां हैं। उन्होंने कहा कि अब केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी इस बारे में दिल्ली सरकार को स्थिति स्पष्ट कर देनी चाहिए।
गौरतलब है कि दिल्ली में प्रशासनिक अधिकारों को लेकर चल रही लड़ाई में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को तब ज़बरदस्त झटका लगा जब दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि दिल्ली सरकार के पास आयोग बनाने का अधिकार नहीं है।
दरअसल गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट के सामने प्रश्न था कि दिल्ली पर किसका कितना अधिकार है यानी दिल्ली सरकार का या फिर उपराज्यपाल का। क्या दिल्ली को लेकर जारी केंद्र सरकार की अधिसूचना सही थी या नहीं, या फिर कि क्या दिल्ली सरकार बिना उपराज्यपाल की अनुमति के फैसले कर सकती है? या फिर उपराज्यपाल दिल्ली सरकार के फैसले से बाध्य है या नहीं....। आखिर में कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि दिल्ली के 'सुल्तान' लेफ़्टिनेंट गवर्नर (उपराज्यपाल) ही है।
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