बैतूल (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश सरकार की राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने बैतूल लोकसभा सीट की भाजपा सांसद ज्योति धुर्वे की अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया है। जाति प्रमाण-पत्रों के बारे में की गई शिकायतों की छानबीन के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित इस समिति की छानबीन अनिवार्य है। इसी बीच, सरकार ने पिछले महीने एक अप्रैल को जारी इस पैनल की रिपोर्ट पर आज बैतूल जिला कलेक्टर को निर्देश दिये हैं कि इस पर कानूनी कार्रवाई करें और ज्योति की जाति प्रमाणपत्र को राजसात कर लें। (दिलचस्प है IAS और विधायक की लव स्टोरी, जल्द करेंगे शादी)
राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने यह जांच बैतूल जिले के वकील शंकर पेंदाम की शिकायत पर की है। पेंदाम ने यह शिकायत 30 मई 2009 को की थी। पेंदाम ने ज्योति के नामांकन को निरस्त करने की मांग की थी। ज्योति बैतूल लोकसभा सीट से भाजपा सांसद हैं। यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। पेंदाम ने दावा किया था कि ज्योति को जो गोंड जाति का प्रमाण पत्र जारी हुआ है, वह तथ्यों पर आधारित नहीं है। शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि जाति प्रमाण पत्र लेते वक्त ज्योति ने अपने दावे के लिए उचित दस्तावेज पेश नहीं किये थे कि वह गोंड जाति की हैं।
शिकायत के बाद उप पुलिस अधीक्षक एससी...एसटी कल्याण द्वारा इस मामले में जांच की गई। यह जांच रिपोर्ट एक अप्रैल 2017 को पेश की गई और इसमें पाया गया कि ज्योति द्वारा पेश किये गये दस्तावेज उसके इन दावों से तालमेल नहीं खाते हैं कि वह गोंड जाति की है। गोंड जाति को मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है।
इस संबंध में प्रतिक्रिया लेने के लिए सांसद से फोन पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। इसी बीच, मध्य प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के. के. मिश्रा ने मांग की है कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र पेश करने के लिए ज्योति की सांसद सदस्यता रद्द की जाये।
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