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30 दिसंबर तक काफी हद तक दूर हो जाएगी कैश की कमी: अमित शाह

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि 30 दिसंबर को खत्म हो रही 50-दिन की डेडलाइन ‘बहुत सावधानी से योजना बनाकर’ तय की गई है और इस डेडलाइन के पूरा होने तक ATMs और बैंकों में हो रही कैश की कमी काफी हद तक दूर हो जाएगी।

Amit Shah in Aap Ki Adalat- India TV Hindi
Amit Shah in Aap Ki Adalat

नई दिल्ली: बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि 30 दिसंबर को खत्म हो रही 50-दिन की डेडलाइन ‘बहुत सावधानी से योजना बनाकर’ तय की गई है और इस डेडलाइन के पूरा होने तक ATMs और बैंकों में हो रही कैश की कमी काफी हद तक दूर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि कारखानों का बिजनस भी दो महीने के अंदर सामान्य हो जाएगा। गौरतलब है कि मोदी सरकार ने 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को 8 नवंबर को चलन से बाहर कर दिया था, जिसके बाद से पूरे देश में कैश की काफी कमी देखी जा रही है।

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इंडिया टीवी के कार्यक्रम 'आप की अदालत' में रजत शर्मा के सवालों का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा, ‘रिजर्व बैंक से ना कोई चीज गोपनीय रखी है, न रिजर्व बैंक को बिना पूछे कोई फैसला हुआ, पर्याप्त मात्रा में जो कंसल्टेशन जिस फोरम में करना चाहिए पीएम को, वो छोटे से फोरम में पर्याप्त मात्रा में कंसल्टेशन करके, उसके ऐडमिनिस्ट्रेटिव, सारी चीजों की जांच कर फैसला लिया गया। कोई जल्दबाजी में लिया गया फैसला नहीं है। ना ऐसी कोई जल्दबाजी करने का कारण भी था।’

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कैश की कमी पर बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, ‘कैश की दिक्कत इसलिए आ रही है क्योंकि पैसे छपने में देरी हो रही है और पहुंचने में भी समय लग रहा है। ऐसा नहीं है कि यह हमारे गणित में नहीं था, 50 दिन का समय सोच-समझ कर कहा गया है। ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं कि 50 दिन पूरे होने पर लाइनें बिल्कुल नहीं लगेंगी, पर 50 दिन में तकलीफ काफी हद तक दूर हो जाएगी’। बीजेपी प्रमुख ने उम्मीद जाहिर की कि कारखानों का बिजनस दो महीने के अंदर सामान्य अवस्था में आ जाएगा। ‘फैक्ट्रियां बंद होने के कारण कैश नहीं है, फैक्ट्रियां बंद होने का कारण व्यवहार जो चेक से नहीं हेता था, 30-40 पर्सेंट, वह है। वह व्यवस्था भी बदलेगी, व्यपारी भी अब अपना व्यवहार बुक्स से करेगा। 2 महीने के बाद धीरे-धीरे सुचारु रूप से चलेगा। थोड़ी मंदी आई है, यह वास्तविकता है।’

बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, ‘मैं जानता हूं कि ATMs और बैंकों के बाहर खड़े लोगों का धैर्य जवाब दे रहा है, मेरी उनके साथ सहानुभूति है, लेकिन मैं यह भी जानता हूं कि इस देश के 80 प्रतिशत गरीब लोग बिजली, सड़क, पीने के पानी और शिक्षा को लेकर भी अपना धैर्य खो रहे हैं। सेना के आधुनिकीकरण के लिए फंड चाहिए, हमें और भी ज्यादा सैटलाइट्स की जरूरत है, ज्यादा कनेक्टिविटी की जरूरत है। लेकिन हम निर्माण के नाम कर क्या कर रहे हैं, हम सिर्फ मजदूरों की तरह काम कर रहे हैं, पैसा आईपीआर पेटंट्स वालों के पास देश के बाहर चला जा रहा है, यहां रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट की कोई व्यवस्था नहीं है, हमारे नौजवानों को कुछ नया करने के लिए कम से कम 50 चीजों की जरूरत है।’

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