नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने के पीछे राजभवन के बाहर गौहत्या को वजह बताया गया है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक गवर्नर ने गौहत्या को बिगड़ती कानून व्यवस्था के लिए जिम्मेदार बताते हुए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश की थी। गवर्नर ने संवैधानिक मशीनरी के नाकाम होने का दावा करते हुए राष्ट्रपति शासन लगाने के वाजिब कारण गिनाने के लिए राजभवन के बाहर मिथुन ‘गाय’ के काटे जाने की तस्वीर बतौर सबूत रिपोर्ट में डाली।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भेजी अपनी रिपोर्ट में गवर्नर राजखोवा ने कहा है कि राजभवन के बाहर गाय की बलि दी गई। इस घटना से वो हैरान रह गए। गवर्नर की इस रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर मामला बताया है और केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। सरकार को शुक्रवार तक अपना जवाब अदालत के सामने दाखिल करना है। बता दें कि मिथुन गाय की गिनती पहाड़ों के मवेशी के तौर पर होती है। यह गोजातीय पशु नॉर्थ ईस्ट के अलाके में पाया जाता है। इसे अरुणाचल प्रदेश में राजकीय पशु का दर्जा हासिल है।
राजभवन में गवर्नर राजखोवा को डर लगता है!
"मुझे और मेरे परिवार की जान को खतरा है। मुझे गाली और धमकी दी गई है। यहां तक कि कुछ मंत्रियों ने मेरे साथ दुर्व्यवहार भी किया है। राजभवन का समय-समय पर घेराव किया जाता है और उन्हें परिवार के साथ राजभवन में ही जला कर मार डालने की धमकी दी जाती है। मुख्यमंत्री तुकी के मंत्रियों ने प्रदर्शनकारियों के साथ मिलकर राजभवन की गेट पर गाय की बलि दी अगर राज्यपाल इस हालात में है तो आम आदमी कैसे सुरक्षित रह सकता है।"
अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस के बाग़ी नेता कालिखो पुल ने गौहत्या की वो तस्वीरें मीडिया को दिखाईं और दावा किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की हालत बेहदल बुरी हो गई थी।
जेडीयू महासचिव के सी त्यागी ने कहा कि संसद में इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि क्या गवर्नर के पद की जरूरत है। अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को जेडीयू ने धारा 356 का दुरुपयोग बताया है।
अरूणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में ताजा याचिका दायर की गई है।
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