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पूर्व सैनिक रामकिशन का आज अंतिम संस्कार, सुसाइड पर उठे सवाल

नई दिल्ली: वन रैंक वन पेंशन को लेकर सुसाइड करने वाले पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल का अंतिम संस्कार आज हरियाणा के भिवानी में होगा। उनके अंतिम संस्कार में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी में शामिल होंगे.

Ex armyman ram krishan grewal- India TV Hindi
Ex armyman ram krishan grewal

नई दिल्ली: वन रैंक वन पेंशन को लेकर सुसाइड करने वाले पूर्व सैनिक रामकिशन ग्रेवाल का अंतिम संस्कार आज हरियाणा के भिवानी में होगा। उनके अंतिम संस्कार में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी में शामिल होंगे. कल रामकिशन की खुदकुशी के मुद्दे कांग्रेस और आप ने खूब हंगामा किया था। उनकी खुदकुशी  को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।

ग़ोरतलब है कि राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कल पीड़ित परिवार से मिलने की कोशिश की थी और उन्हें हिरासत में ले लिया गया था हालंकि बाद में हालांकि बाद में छोड़ दिया गया।

रामकिशन की आत्महत्या तब बड़ा मुद्दा बन गई जब कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने विरोध प्रदर्शन किया। सरकार ने सुसाइड को लेकर कई सवाल उठाए हैं।

राम किशन ग्रेवाल दिल्ली में रक्षा मंत्री को ज्ञापन देने गए थे लेकिन वहीं पर उन्होंने जहर खाकर जान दे दी। जहर खाने के बाद रामकिशन ने बेटे प्रदीप से फोन पर कहा कि वो जान दे रहे हैं। ये बातचीत प्रदीप के फोन में रिकॉर्ड हो गई थी।

रिटायर्ड सूबेदार रामकिशन ग्रेवाल ने उसी पन्ने पर सुसाइड नोट लिखा, जिस पर रक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन था। रामकिशन ने इसमें पेंशन और भत्ता बढ़ाने की मांग की थी। 

इस बीच सरकार ने पूर्व सैनिक की खुदकुशी पर सवाल उठाए हैं।सरकार के सूत्रों का कहना है कि राम किशन को पेंशन मिलने में देर हुई क्योंकि बैंक के हिसाब में गड़बड़ी थी। उनको अपने दूसरे साथियों की तरह पूर्व सैनिक वेलफेयर सेल में संपर्क करना चाहिए था। उनके मामले को भी दूसरे मामलों की तरफ आराम से सुलझाया जा सकता था अगर वो सीधे मंत्रालय में संपर्क करते। 31 अक्टूबर को लिखा गया उनका सुसाइड लेटर और एक तारीख को उनका सुसाइड सवाल खड़े करता है। 

सूत्रों ने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि जब रामकिशन ने ये कदम उठाया तो उनके साथ उस वक्त कौन मौजूद था..उन्हें जहर कहां से मिला? और क्या किसी ने उनकी परेशानी का फायदा उठाकर उन्हें इस कदम के लिए उकसाया? मंत्रालय को रामकिशन की तरफ से मिलने की कोई प्रार्थना नहीं की गई थी और ना ही उनके लेटर में ऐसी कोई बात है।

जानकारी के मुताबिक सेना में किसी भी जवान को ओआरओपी का फायदा तभी मिलता है जबकि उसने कम से कम 15 साल सेना में काम किया हो, लेकिन रामकिशन ने टेरिटोरियल आर्मी में छह साल काम किया था।

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