1. Hindi News
  2. भारत
  3. राजनीति
  4. भारत ने पाक के साथ रिश्ते में अमेरिकी मध्यस्थता की पेशकश को किया ख़ारिज

भारत ने पाक के साथ रिश्ते में अमेरिकी मध्यस्थता की पेशकश को किया ख़ारिज

भारत ने पाकिस्तान के साथ रिश्तों में अमेरिकी मध्यस्थता की पेशकश को सिरे से ख़ारिज कर दिया है और कहा है कि पाकिस्तान के साथ उसके सभी द्विपक्षीय मुद्दों पर उसके रुख में कोई परिवरितन नहीं हुआ है।

Gopal Bagle- India TV Hindi
Gopal Bagle

नई दिल्ली: भारत ने पाकिस्तान के साथ रिश्तों में अमेरिकी मध्यस्थता की पेशकश को सिरे से ख़ारिज कर दिया है और कहा है कि पाकिस्तान के साथ उसके सभी द्विपक्षीय मुद्दों पर उसके रुख में कोई परिवरितन नहीं हुआ है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने मंगलवार को कहा कि भारत सरकार यह मानती है कि पाकिस्तान के साथ सभी विवादों का समाधान बिना किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के द्विपक्षीय बातचीत से ही होनी चाहिए।  

गौरतलब है कि विदेश मंत्रालय की यह टिप्पणी संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की स्‍थाई सदस्‍य निकी हेली के इस बयान के बाद आई है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भूमिका निभा सकते हैं। बागले ने कहा कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दों पर बातचीत के लिए आतंकवाद मुक्त शांतिपूर्ण माहौल की शर्त पर भारत अब भी कायम हैं।

संयुक्‍त राष्‍ट्र में अमेरिका की स्‍थाई सदस्‍य निकी हेली का कहना है कि दोनों देशों के बीच संबंधों को बेहतर करने के लिए होने वाली शांति प्रक्रिया में अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप शामिल होना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप सरकार इस बात को लेकर काफी गंभीर है कि भारत और पाकिस्‍तान के बीच बढ़ रही दूरियों को कैसे खत्‍म किया जाए। हर कोई यह देखना चाहता है कि यह दोनों देश मतभेदों को मिटाकर कैसे आगे आते हैं। इस दौरान उन्‍होंने यह भी कहा कि ट्रंप प्रशासन अपनी भूमिका को लेकर संभावना तलाश रहा है साथ ही बातचीत भी कर रहा है। एक अखबार को दिए इंटरव्‍यू में हैली ने कहा कि उन्‍हें खुशी होगी यदि दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने के लिए यूएस मध्‍यस्‍थ की भूमिका में होगा।

इधर विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए ट्रंप प्रशासन के संभावित हस्तक्षेप के बारे में संयुक्त राष्ट्र में नियुक्त अमेरिकी दूत निक्की हेली की टिप्पणियों के आधार पर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

वर्ष 2009 से 2011 तक अमेरिका में भारत की राजदूत रही मीरा शंकर ने कहा, ‘सबसे पहले, ये टिप्पणियां एक सवाल के जवाब में थी। हम नहीं जानते कि क्या यह अमेरिका का कोई नीतिगत फैसला है या बगैर किसी योजना के की गई टिप्पणी है। टिप्पणियों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।’

मीरा के विचार से सहमति जताते हुए पूर्व राजनियक जी पार्थसारथी ने भी हेली की टिप्पणी को तवज्जो नहीं देते हुए कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की महज प्रतिनिधि हैं और उन्होंने इस बात का जिक्र कभी नहीं किया कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करेगा।

उन्होंने कहा, ‘किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंचिए. अमेरिका ने भारत और पाक के बीच हमेशा ही तनाव कम करने का समर्थन किया है।’ पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रह चुके पार्थसारथी ने कहा कि दोनों दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच करगिल युद्ध के दौरान सहित तनाव खत्म करने के लिए अमेरिकी हस्तक्षेप के अन्य दृष्टांत रहे हैं। पार्थसारथी ने कहा कि हेली का बयान यह संकेत नहीं करता कि अमेरिका मध्यस्थता करेगा। 

अमेरिका में नियुक्त रह चुके भारत के पूर्व राजनयिक नरेश चंद्र ने अमेरिकी टिप्पणी को एक चतुराई भरा कदम बताया जो पाकिस्तान को इस मुद्दे पर संदेश भेजेगा कि वह इस्लामाबाद के साथ है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में एक सक्रिय लॉबी है जो भारत और पाकिस्तान के बीच मुद्दों को सुलझाने में वाशिंगटन का हस्तक्षेप चाहता है।

Latest India News