नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की ‘दीदी’ ममता बनर्जी का अपना अलग ही रुतबा है। दीदी की आंधी इस बार विधानसभा चुनाव में भी ऐसी चली कि जनता ने उन्हें प्रचंड बहुमत देकर इस बार भी सत्ता सौंप ही दी। ममता बनर्जी जड़ो से जुड़ी नेता है जिन्हें पैदल मील नापना बेशक अच्छा लगता है। आइये जानते है उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें-
खुद गढ़ती हैं नारे
ममता बनर्जी खुद अपने नारे गढ़ती है। उनके द्वारा बनाए गए नारों का जनता पर इस बार अच्छा असर पड़ा। ‘ठाडा माथ कूल कूल, आबार आश्बे तृणमूल’ (ठंडा माथा कूल कूल, फिर आएगी तृणमूल), हाथ, हाथुड़ी, पद्दो, होबे एबार जोब्दो (हथ, हथौड़ी, कमल फिर मिलेगा तोहफा माकूल) उनके खुद के बनाए हुए नारे हैं।
सुरक्षा की परवाह किए बगैर भीड़ से मिलती हैं दीदी
ममता बनर्जी जब भी रैली करने जाती है तो वह अपन सुरक्षा दस्ते की गुजारिश के बावजूद मंच की तरफ नहीं बढ़तीं इसके बजाए वे भीड़ से मिलना शुरू कर देती है। वे लोगों से हाथ मिलाती हैं, नमोश्कार करती हैं और अपनी दीदी को छूने को लालायित लोगों की इच्छा पूरी करती हैं।
पत्रकारों से मजाक
दीदी चुनाव प्रचार में उनके कदमों से कदम मिलाने वाले पत्रकारों से मजाकिया लहजे में कहती हैं, ‘आमि भूतेर मतो खाटी (मैं भूतों की तरह खटती हूं)।’
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