नई दिल्ली: तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता को दफनाने को लेकर विवाद पैदा हो गया है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, जयललिता की 'मोक्ष' प्राप्ति के लिए उनके रिश्तेदारों ने मंगलवार को उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज से किया। रिश्तेदारों का मानना था कि जयललिता का अंतिम संस्कार नहीं किया गया था, बल्कि दफनाया गया था इसिलए 'मोक्ष' की प्राप्ति के लिए मंगलवार को उनका दाह संस्कार किया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार तमिलनाडु के श्रीरंगपटना में कावेरी नदी के तट पर मंगलवार को जयललिता का दाह संस्कार किया गया। उनके शव की जगह एक गुडिया बनाई गई थी। मुख्य पुजारी रंगनाथ लंगर ने उनके दाह संस्कार की अंतिम रस्में पूरी करवाई। उनके अंतिम संस्कार की रस्में पाँच दिनों तक चलेंगी। इस अंत्येष्टि में जयललिता के सौतेले भाई वरदराजू शामिल हुए। उन्होंने ही जयललिता के दफनाने का विरोध भी किया था।
इसलिए दफनाया गया था
जयललिता को मरीना बीच पर उनके राजनीतिक गुरु एमजीआर के पास ही दफनाया गया था। उसके पीछे तर्क दिया गया उनका द्रविड़ मूवमेंट से जुड़ा होना। द्रविड़ आंदोलन जो हिंदू धर्म के किसी ब्राह्मणवादी परंपरा और रस्म में यकीन नहीं रखता। जया एक द्रविड़ पार्टी की प्रमुख थीं, जिसकी नींव ब्राह्मणवाद के विरोध के लिए पड़ी थी। एमजीआर को भी उनकी मौत के बाद दफनाया गया था। उनकी कब्र के पास ही द्रविड़ आंदोलन के बड़े नेता और डीएमके के संस्थापक अन्नादुरै की भी कब्र है, अन्नादुरै तमिलनाडु के पहले द्रविड़ मुख्यमंत्री थे।
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