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ममता बनर्जी: दो बार रेल मंत्री रह चुकी दीदी बतौर मुख्यमंत्री दूसरी पारी को तैयार

कई सालों से वेस्ट बंगाल में एक एक ही नाम चला आ रहा है और वह है दीदीगिरी। यह नाम साल 2012 में ममता बनर्जी से प्रभावित होकर रखा गया था।

ममता बनर्जी- India TV Hindi
ममता बनर्जी

नई दिल्ली: कई सालों से वेस्ट बंगाल में एक एक ही नाम चला आ रहा है और वह है दीदीगिरी। यह नाम साल 2012 में ममता बनर्जी से प्रभावित होकर रखा गया था। इस नाम  से दक्षिण बंगाल की इस चीफ मिनिस्टर ने लोगों के सामने अपनी एक मजबूत छवि बनाई है। पिछले कुछ महीनों से ममता बनर्जी का नाम बहुत से  विवादास्पद चीजों के साथ जोड़ा जा रहा है जिसमें उन्होंने एक कॉलेज प्रोफेसर को उनका कार्टून बनाने को जुर्म में गिरफ्तार कर लिया था।

जब वे बहुत छोटी थीं तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। अपने स्कूली दिनों से ही राजनीति से जुड़ी ममता कांग्रेस से लम्बे समय तक जुड़ी रहीं। 70 के दशक में उन्हें राज्य महिला कांग्रेस का महासचिव बनाया गया। उस समय में वे कॉलेज में पढ़ ही रही थीं।

ममता के पिता स्वतंत्रता सेनानी थे उनकी मृत्यु के बाद ममता ने अपने परिवार को चलाने के लिए दूध विक्रेता का कार्य करने का निर्णय लिया। मुसीबत के उन दिनों ने ममता को सख्त बना दिया और उन्होंने पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्टों को सत्ता से बेदख़ल करने के अपने सपने को पूरा करने में दशकों गुजार दिए।

ममता बनर्जी ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से इस्लामिक इतिहास में मास्टर डिग्री हासिल की। श्रीशिक्षायतन कॉलेज से उन्होंने बी.एड. की डिग्री भी ली। उन्होंने जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज, कोलकाता से कानून में भी एक डिग्री ली थी। ममता बनर्जी को कविताएं पढ़ने और लिखने का भी बहुत शौक है। उन्होंने पोरिबोर्तन (परिवर्तन) और कोबिता (कविता) जैसी कविताएं भी लिखी हैं। ममता बनर्जी बेहद ही साधारण जीवन जीती है वह हमेशा से ही सूती साड़ी और रबड़ की चप्पल में ही रहती है।

वर्ष 1999 में उनकी पार्टी भाजपा के नेतृत्व में बनी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार का हिस्सा बन गई और उन्हें रेलमंत्री बना दिया गया। वर्ष 2002 में उन्होंने अपना पहला रेल बजट पेश किया और इसमें उन्होंने बंगाल को सबसे ज्यादा सुविधाएं देकर सिद्ध कर दिया कि उनकी दृष्टि बंगाल से आगे का नहीं देख पाती है। 2011 में टीएमसी ने भारी बहुमत से विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की और ममता राज्य की मुख्यमंत्री बनीं। इस बार उन्होंने राज्य से वामपंथी मोर्चे का सफाया कर दिया था और लगातार 34 वर्ष तक सत्ता में रहने के बाद वामपंथी सत्ता से बाहर हो गए।

2009 के संसदीय चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में 19 सीटें जीत लीं। दूसरी बार रेलमंत्री बनने पर भी ममता का फोकस बंगाल और बंगाल के चुनाव ही रहा। वे रेलमंत्री के तौर पर अपना काम छोड़कर बंगाल में अपनी पार्टी का प्रचार करती रहीं। ममता ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृहमंत्री शिवराज पाटिल से कहा कि बंगाल में माकपा समर्थकों की हिंसक गतिविधियों पर रोक लगाई जाए। बाद में जब राज्य सरकार ने परियोजना को समाप्त कर दिया तब हिंसक विरोध भी थम गया।

 

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