‘मोदी सरकार के तीसरे वर्ष में और अनेक महत्वपूर्ण विधेयक लाये जाएंगे’
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार ने अपना दो वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है। अपने कार्यकाल के मध्य में पहुंचने वाली किसी भी सरकार के लिए यह सामान्य बात है कि वह अपने भविष्य की योजनाओं की रूपरेखा को और मजबूती प्रदान करे।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजग सरकार ने अपना दो वर्ष का कार्यकाल पूरा कर लिया है। अपने कार्यकाल के मध्य में पहुंचने वाली किसी भी सरकार के लिए यह सामान्य बात है कि वह अपने भविष्य की योजनाओं की रूपरेखा को और मजबूती प्रदान करे। मोदी सरकार के लिए पहले दो वर्ष स्लॉग ओवर :क्रिकेट की पारी के आखिरी ओवर जिनमें बल्लेबाज तेजी से रन बटोरने का प्रयास करते हैं: की तरह रहे। यह सरकार एक विशेष माहौल में बनी थी । संप्रग सरकार ने नीतियां बनाने का काम त्याग दिया था । उसे समय नीतिगत पंगुता का दौर कहा जा रहा था। वैश्विक और घरेलू निवेशक-दोनों भारत से जाने लगे थे। भारत उनके रडार से बाहर हो चुका था। घोटालों और अनैतिक कार्यो से सरकार की विश्वसनीयता बुरी तरह प्रभावित थी। अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री कार्यालय के हाथ में नहीं रह गये थे।
वर्ष 2014 का आम चुनाव आकांक्षाओं का चुनाव था। लोकसभा में निर्णायक बहुमत मिलने से नई सरकार के लिए फैसले लेना आसान हो गया । प्रधानमंत्री स्वभावत: से निर्णायक व्यक्तित्व के हैं । ऐसे में प्रशासन चलाने का तरीका बदल गया । प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम ने देश में बदली हुई राजनीतिक और प्रशासनिक संस्कृति की शुरूआत की और यह दिखा दिया कि देश के केंद्र में एक साफ सुथरी सरकार बन सकती है जहां फाइलें स्वत: आगे बढ़ीं, विचौलिये बेरोजगार हो गये, विवेकाधिकार खत्म कर दिये गए । इन दो वर्षो के कार्यकाल में भारत नीतिगत पंगुता के दौर से उबर कर तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में तब्दील हो गया । संघीय प्रणाली को इतना सम्मान दिया गया जितना उसे पहले कभी नहीं मिला । प्रधानमंत्री ने अपनी मजबूत पकड़ के साथ देश को एक ऐसी सरकार दी जो पहले की सरकारों से भिन्न है ।
भारत को निवेश की जरूरत थी । निवेश से ही आर्थिक गतिविधियों की शुरूआत होती है। संप्रग सरकार के दौरान बैंकों और निजी क्षेत्र की कंपनियों ने अपनी स्थिति तंग कर ली और उनके पास संसाधन नहीं रह गये । इसलिए पिछले दो वर्षो में अधिकतर निवेश सार्वजनिक खर्च में वृद्धि या प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के तौर पर आया है । निवेश का जोर मुख्यत: भारत के ढांचागत, ग्रामीण और सामाजिक क्षेत्रों पर रहा। राजमार्ग क्षेत्र फिर से फलने फूलने लगा । देश के ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर इस वर्ष पहले के मुकाबले तीन गुना अधिक राशि खर्च होगी। 25 नये क्षेत्रीय हवाई अड्डे तैयार किये जायेंगे । रेलवे को मजबूत किया जा रहा है। 400 प्रमुख स्टेशनों को आधुनिकतम बनाकर भारतीय रेलवे का कायाकल्प किया जायेगा । देश की छवि निखर जायेगी । देश को जितनी बिजली की जरूरत है उससे अधिक उसके पास उपलब्ध है। अतिरिक्त निवेश कर बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। तेल एवं गैस क्षेत्र में सुधार के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाये गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में हालात सुधारने के लिए बिना बिजली वाले गांवों का विद्युतीकरण, ग्रामीण क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाने, ग्रामीण जल मल निकासी व्यवस्था, सबके लिए आवास, सिंचाई में अधिक निवेश, रोजगार गारंटी योजना के लिए अधिक धनराशि, किसानों को निकालने के लिये रियायती दरों पर पूंजी की उपलब्ध करने के लिए ब्याज सहायता हेतु अपेक्षाकृत अधिक धन का प्रावधान जैसी योजनाएं शुरू की गईं । यह सब काम ग्रामीण भारत के वित्त पोषण के उपाय हंै। सामाजिक क्षेत्र में युगांतकारी योजनाएं लागू की गई । प्रधानमंत्री जनधन योजना विश्व में अब तक की सर्वाधिक व्यापक वित्तीय समायोजन की योजना है । आज हर भारतीय को बैंक में अपना खाता खोलने की सुविधा है। सब्सिडी को इस तरह तर्कसंगत बनाया गया है ताकि इनका लाभ गरीबों और जरूरतमंदों को ही प्राप्त हो। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण योजना से ऐसा बहुत सा पैसा बच रहा है जो अब तक उन लोगों को जा रहा था जो इसके हकदार नहीं थे, अब यह पैसा उन लोगों के पास पहुंच रहा है जो इसके हकदार हैं।
सरकार ने व्यापक सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए रियायती बीमा योजना, रोजगारपरक मुद्रा योजना, महत्वपूर्ण फसल बीमा योजना और समाज के कमजोर तबके के लिए प्रस्तावित स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी अनेक योजनायें शुरू की हैं। इतिहास में पहली बार कोयला, खनिज, स्पेक्ट्रम आदि केवल आनलॉइन नीलामी के जरिये उपलब्ध हो रहे हैं। खनन क्षेत्र को निवेश के लिए खोला गया है। भेदभाव मुक्त के आवंटन प्रणाली पहले की घोटाला संस्कृति से बिल्कुल भिन्न है। भारत में कराधान को बहुत अधिक आक्रामक माना जाता था। आज 94 प्रतिशत करदाता अपने रिटर्न आनलाइन फाइल करते हैं । सभी करदाताओं को अपने रिफंड की राशि घर बैठे ही डिजिटलीकृत प्रणाली से मिल जाती है और केवल एक प्रतिशत लोगों को ही व्यक्तिगत तौर पर अपने कर आकलन विभाग से सम्पर्क करना पड़ता है। प्रत्यक्ष करों को तर्कसंगत बनाया जा रहा है ताकि निर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के साथ ही निवेश को बढ़ाया जा सके ।
वस्तु एवं सेवा कर :जीएसटी: लागू होने जाने के बाद यह आजादी के बाद अब तक के सबसे बड़े कर सुधारों में शामिल होगा । इससे देशभर में वस्तु एवं सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सकेगी । इससे कर चोरी रूकेगी, आधिक कर एकत्र हो सकेगा और जीडीपी :अर्थव्यवस्था का आकार: बढ़ेगा । बैंकिंग क्षेत्र का काफी विस्तार हुआ है । छोटे बैंकों और पेमेंट बैंकों ने उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्प पेश किये हैं। ऐसे बैंकों के लिए लाइसेंस का अवेदन अब किसी समय किया जा सकता है। दिवाला और रिण शोधन अक्षमता कानून, सरफेसी कानून और रिण उगाही पंचाट को मजबूत कर बैंकों को अपनी बकाया धनराशि वसूलने में काफी सहूलियत होगी ।
14वें वित्त आयोग ने केंद्रीय पूल में राज्यों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढाकर 42 प्रतिशत कर दी है, इससे राज्य सरकारें विकास पर अधिक धनराशि खर्च करने में समर्थ हुई हैं। पिछले दो वर्षो में राजग ने देशभर में अपना जनाधार बढ़ाया है। लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, जम्मू कश्मीर और असम में विधानसभा चुनाव जीतकर राजग ने अपनी सरकार बनाई है। इस अवधि में हमें दिल्ली और बिहार में हार का सामना भी करना पड़ा ।
2014 के बाद अब तक जितने भी राज्यों में चुनाव हुए उन सब में कांग्रेस को पराजय मिली । आज देश के 15 राज्यों में राजग की सरकार है और इसका जनाधार बढ़ा है। अगले एक वर्ष में सरकार बहुत से और महत्वपूर्ण विधेयक लायेगी और नये नीति निर्धारक कदम उठाये जायेंगे। हमारा प्रयास होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकास करे । हमने दुनिया को दिखा दिया है कि हम एक अलग तरह की सरकार हैं और हम प्रगति की दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे।