नई दिल्ली: बांग्लादेश को अपना ‘खास पड़ोसी’ बताते हुए भारत ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शनिवार से शुरू होने वाली ‘ऐतिहासिक’ यात्रा से दोनों देशों को ऊर्जा, बिजली और संपर्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत एवं गहरा बनाने में मदद मिलेगी।
मोदी की ढाका यात्रा के बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्ष संसद द्वारा हाल ही में 41 साल पुराने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए पारित किए गए भू सीमा समझौते (एलबीए) की पुष्टि के लिए कई चीजों का आदान प्रदान करेंगे। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस आदान प्रदान समारोह में मौजूद रहेंगी।
अपनी बांग्लादेशी समकक्ष शेख हसीना के साथ वार्ता के अलावा प्रधानमंत्री अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान विपक्ष के नेता रौशन इरशाद और पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया समेत प्रमुख राजनीतिक नेताओं से मुलाकात करेंगे। विदेश सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री की यात्रा बेहद ऐतिहासिक है और इसका कारण बांग्लादेश के साथ सर्वाधिक लंबे भू सीमा मुद्दे का हल होना है। प्रधानमंत्री इस उपलब्धि के साथ बांग्लादेश जाएंगे और हमारे पास समझौते की पुष्टि के लिए एक दूसरे के साथ आदान प्रदान करने के लिए कुछ चीजें होंगी।
निश्चित रूप से यह आसानी से उपलब्ध नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के साथ एलबीए को संसद द्वारा पारित किए जाने से सद्भावना तथा विश्वास पैदा हुआ है और इससे 4096 किलोमीटर लंबी सीमा के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी जिसमें से अधिकतर हिस्सा मुक्त आवाजाही वाला है। इससे अवैध प्रवासियों और तस्करी के मुद्दों को भी सुलझाने में मदद मिलेगी।
विदेश सचिव ने कहा कि एलबीए के लागू होने के बाद भारत को देश में लोगों की आवाजाही की उम्मीद है और इसके लिए इंतजाम किए गए हैं। दोनों पक्षों द्वारा इस यात्रा के दौरान कोलकाता और अगरतला के बीच बस सेवा को हरी झंडी दिखाए जाने के अलावा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है। बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति के संबंध में भी एक समझौते को अंतिम रूप दिया गया है और इस पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे।
बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल (बीबीआईएन) मोटर वाहन समझौते के बारे में जयशंकर ने बताया कि संबंधित समझौते पर ‘कुछ सप्ताह’ में हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है। यह पूछे जाने पर कि क्या बांग्लादेश में बढ़ती असहिष्णुता के बारे में भी मोदी की बैठकों में चर्चा होगी, उन्होंने कहा कि बांग्लादेश एक खास पड़ोसी है। यह कई मायने में एक ऐसे समाज का प्रतीक है जहां बहुत कठिन परिस्थितियों में भी लोकतांत्रिक जड़ों ने अपनी पकड़ बनाए रखी है। उन्होंने कहा कि एक लोकतंत्र के रूप में हम बांग्लादेश का समर्थन करते हैं। हम एक बेहद जिम्मेदार पड़ोसी के रूप में उनकी सराहना करते हैं जिनके साथ हमने आपसी संवेदनशीलता के साथ महान रिश्ते विकसित किए हैं। मोदी की यात्रा के दौरान तीस्ता जल बंटवारा समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे लेकिन अन्य नदियों के जल के बंटवारे और जलमार्गों पर चर्चा होने की संभावना है। दोनों देश विशेष रूप से रेल संपर्क को मजबूत करने के इच्छुक हैं, खासतौर से उन रेल संपर्कों को बहाल करने में जो 1965 से पूर्व रहे हैं।
दोनों देश भारत से बांग्लादेश के विभिन्न बंदरगाहों पर छोटे पोतों की आवाजाही के लिए एक तटीय जहाजरानी समझौते पर भी हस्ताक्षर करने वाले हैं। जयशंकर ने कहा कि बांग्लादेश के साथ संपर्क बढ़ने से पूर्वोत्तर क्षेत्र को दक्षिण पूर्वी एशिया से जोड़ने में मदद मिलेगी।
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