राफेल सौदे की अधिकतर बाधाओं को दूर कर लिया गया है: रक्षा राज्य मंत्री
नई दिल्ली: रक्षा राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने आज कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के अरबों यूरो के सौदे की अधिकतर बाधाओं को भारत एवं फ्रांस ने दूर कर लिया है और

नई दिल्ली: रक्षा राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने आज कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के अरबों यूरो के सौदे की अधिकतर बाधाओं को भारत एवं फ्रांस ने दूर कर लिया है और शेष बाधाओं को रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) की अगली बैठक में दूर कर लिया जाएगा जो बृहस्पतिवार को निर्धारित है। उनसे एक संवाददाता ने यह पूछा कि 65 हजार करोड रूपये की अनुमानित लागत वाला यह सौदा ऐसा समय में किया गया है जब देश में कुछ लोग घास की रोटी खा रहे हैं। इस पर सौदे का बचाव करते हुए मंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा के बिना वह भी संभव नहीं हो पाएगी।
रक्षा साजोसामान की खरीदारी के लिए रक्षा मंत्रालय के सर्वोच्च निकाय डीएसी की बैठक रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के चीन की यात्रा से लौटने के एक दिन बाद 21 अप्रैल को हो सकती है। भारतीय वायु सेना के प्रमुख अरूप राहा ने राफेल सौदे पर शीघ्र हस्ताक्षर की उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा, यह बहुत आगे के चरण में है। सिंह ने यहां संवाददाताओं से कहा, मैं आपको केवल यह बता सकता हूं कि कई बाधाओं का समाधान कर लिया गया है। जब डीएसी के समक्ष यह मामला आएगा तब कुछ अन्य (शेष) मुद्दों को भी हल कर लिया जाएगा। आगामी डीएसी में उन्हें सुलझा लिया जाएगा और इसी लिए मेरा सोचना है कि रास्ता साफ होगा। उनसे पूछा गया था कि सौदे पर कब हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
एयर चीफ मार्शल राहा से जब आईएएफ के एक सम्मेलन के इतर यही प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने कहा, हमने देखा कि इतने वर्ष गुजर गए। मैं कोई आश्वासन कैसे दे सकता हूं? लेकिन यह बहुत आगे के चरण में है। सिंह ने इस सुझाव को दरकिनार कर दिया कि एक राफेल विमान की कीमत पर देश में निर्मित कम से कम छह हल्के लड़ाकू विमान तेजस खरीदे जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों विमानों की प्रकृति अलग है और भारतीय वायुसेना को दोनों की आवश्यकता है।
उनसे एक टीवी संवाददाता ने पूछा कि सरकार राफेल के मूल्य को सही कैसे ठहरा सकती है जबकि देश के कुछ भागों में घास की रोटी खायी जा रही है, तो सिंह ने कहा कि विकास तभी हो सकता है जब देश की सीमाएं एवं आकाश सुरक्षित हो। उन्होंने कहा, किसी देश में विकास तभी हो सकता है जब सीमाएं सुरक्षित हो और जब देश का आकाश सुरक्षित हो। और यदि यह सुरक्षा नहीं है तो घास की रोटियां भी नहीं खायी जा सकती। सिंह ने कहा, लिहाजा, राफेल की जरूरत है। यह एक अलग तरह का विमान है। एलसीए भिन्न तरह का विमान है। दोनों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस बात को सुनिश्चित करने के प्रयास किये जा रहे हैं कि रक्षा के लिए आवंटित धन का समुचित ढंग से व्यय हो सके ताकि वायु सेना को मजबूत बनाया जा सके।
भारत और फ्रांस 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के ऑर्डर के मामले में आगे बढ़ सकते हैं क्योंकि दोनों देशों ने कीमत को लेकर अपने मतभेदों को कम कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीदारी को लेकर सहमति पत्र पर करीब चार महीने पहले हस्ताक्षर किए थे। भारतीय पक्ष कीमत कम कराने के लिए पूरी कोशिश रहा है। सौदे पर हस्ताक्षर में देरी को लेकर उठ रहे प्रश्नों के बावजूद पर्रिकर ने इस मामले में दबाव में आने से इनकार कर दिया है।
सूत्रों ने कहा कि बढती लागत और डॉलर की कीमत को ध्यान में रखते हुए संप्रग सरकार की निविदा के अनुसार 36 राफेल विमानों की कीमत 65,000 करोड़ रुपए से थोड़ी अधिक है। भारत ने विमान में जिन बदलावों की मांग की है उनमें लगने वाली लागत इसमें शामिल है। सूत्रों ने कहा, कीमत को आठ अरब यूरो (59,000 करोड़ रुपए) से कम कराने का प्रयास किया जा रहा है। अंतिम सौदा मई के अंत में हो सकता है।