नई दिल्ली: पूर्वोत्तर राज्य मेघालय में भी सत्ताधारी कांग्रेस सरकार के ऊपर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। राज्य के कांग्रेसी नेताओं के एक तबके ने इस संबंध में खतरे की घंटी बजाई है। उनका कहना है कि उत्तराखंड की तर्ज पर यहां भी भाजपा, कांग्रेस में असंतुष्ट खेमे को बगावत के लिए उकसा रही है।
इस संबंध में एक आंतरिक नोट सोनिया गांधी को इन नेताओं ने भेजा है जिसमें शीर्ष नेतृत्व को आगाह करते हुए कहा गया है कि पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष डीडी लपांग समेत कई कांग्रेसी नेता भाजपा नेता हेमंत बिश्व शर्मा से मिल रहे हैं। भाजपा के जनरल सेक्रेट्री राम माधव से भी उनकी मीटिंग हुई है।
सूत्रों के अनुसार इस समय कांग्रेस आलाकमान अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हुई गलती को दोहराने के पक्ष में नहीं है। कांग्रेस पर आरोप लगा था कि उसने समय रहते अपने असंतुष्ट विधायकों की मांगों पर गौर नहीं किया। राहुल गांधी को भी काफी आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा था।
सूत्रों के अनुसार इस बार राहुल ने मेघालय के इन विधायकों से मिलने की इच्छा जताई है। आलाकमान इस विचार का बताया जाता है कि मंत्रिमंडल का विस्तार कर इन विधायकों को कहीं समायोजित किया जाए।
उधर, मुख्यमंत्री संगमा कहते हैं कि यह पार्टी का अंदरुनी मामला है। इस पर जल्द ही पार पा लिया जा११एगा। उल्लेखनीय है कि 60 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के 30 विधायक हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दो तथा 11 निर्दलीय विधायकों का समर्थन सरकार को मिला हुआ है।
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