नयी दिल्ली: अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा है कि हाल ही के महीनों में पाकिस्तान ने उग्रवाद के ख़िलाफ़ मुहिम में काफी तेज़ी दिखाई है लेकिन साथ ही ये भी आग्रह किया कि पाकिस्तान को उसकी सीमा में छुपे उग्रवादियों से और सख़्ती से निपटना चाहिये क्योंकि इसकी वजह से पड़ौसी देश भारत के साथ तनाव बढ़ रहा है।
केरी ने बुधवार को अपनी भारत यात्रा के दूसरे दिन कहा, “ये साफ है कि पाकिस्तान को उन गुटों के ख़िलाफ़ कार्रवाई में तेज़ी लानी है जो अग्रवादी गतिविधियों में लिप्त हैं।” अमेरिका ने पाकिस्तान से स्पष्ट कर दिया है कि उसे तालिबान, हक़्कानी और लश्कर-ए-तैयबा जैसे गुटों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी पड़ेगी जिन पर शक़ है कि वे भारत और अफ़ग़ानिस्तान पर हमले के लिए पाकिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
केरी ने ये भी कहा, “ईमानदारी से देखा जाए तो ख़ुद पाकिस्तान भी आतंकवाद का शिकार रहा है और हमें उसका समर्थन करना चाहिये और समझना चाहिये कि इससे (आतंकवाद) से निपटना कितना मुश्किल काम है।”
दिलचस्प बात ये है कि उधर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अज़ीज़ ने जॉन कैरी के आतंकवाद को लेकर दिए बयानों पर कहा है कि जब वह वहां (भारत) होंगे तो कुछ और बयान देंगे जब यहां होंगे तो उनका बयान कुछ और होगा। सरताज अज़ीज़ ने कहा कि जॉन कैरी के बयानों से पाकिस्तान की कोई बदनामी नहीं हो रही है।
अमेरिका का आरोप रहा है कि पाकिस्तान हक़कानी ग़ुट के ख़िलाफ़ कुछ नहीं करता लेकिन पाकिस्तान इन आरोपों को ख़ारिज करता रहा है।
ग़ौरतलब है कि दिल्ली में जॉन कैरी से मुलाकात के बाद भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि पाकिस्तान को लश्करे तैयबा, जैश ए मोहम्मद और दाऊद कंपनी को सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराना बंद करना चाहिए क्योंकि दुनिया में अच्छे आतंकवादी और बुरे आतंकवादी नहीं होते।
वहीं जॉन कैरी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ और पाक सेना प्रमुख को सलाह दी थी पाकिस्तान चरमपंथी संगठनों को पनाह देना बंद करे।
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