नयी दिल्ली: भारत स्थित पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित का कहना है कि भविष्य में भारत के साथ संबंधों को लेकर पाकिस्तान का रवैया सकारात्मक और सृजनात्मक रहेगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दोनों देश परिपक्वता दिखाते हुए मौजूदा संकट से उबर जाएंगे।
अंग्रेज़ी दैनिक टेलीग्राफ़ के अनुसार बासित ने कहा, “जैसा कि हमारे प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में कहा है, पाकिस्तान भारत के साथ सामान्य सहयोगात्मक संबंध चाहता है और शांतिपूर्ण तरीके से सभी मसले हल करना चाहता है।”
पठानकोट वाली भावना बहाल हो
बासित ने कहा कि जांच एजेंसी अभी भी उड़ी हमले की जांच कर रही है जिसमें 18 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। “मैं बहुत विनम्रता के साथ सुझाव देना चाहूंगा कि जल्दबाज़ी में किसी नतीजे पर पहुंचने से कुछ नहीं होगा। हमने देखा है कि कैसे हमने पठानकोट हमले के बाद सहयोग किया था। चीज़े सही दिशा में बढ़ रहीं थीं। अगर हम वहीं भावना बरक़रार रखें तो मुझे पूरा भरोसा है कि हम हालात को बदतर होने से रोक सके हैं।''
बासित ने कहा कि पठानकोट के बाद जो सहयोग की भावना बनी थी उसे फिर सजीव करने की ज़रुरत है। “मैं एक राजनयिक हूं और मैं चाहूंगा कि जीत कूटनीति की हो। मैं नहीं मानता कि द्विपक्षीय कूटीनीति की गुंजायश ख़त्म हो गई है।”
उड़ी हमले के बाद ख़राब हुए हालात
उन्होंने कहा कि धीमी गति के बावजूद संबंध बेहतर हो रहे थे लेकिन आठ जुलाई को हालात बदल गए (जब हिज़्बुल मुजाहिदीन का आतंकी मारा गया था)। उसी दिन से लय बिगड़ गई। दोनों देशों के राजनयिकों के सामने अब वो लय दुबारा हासिल करने की चुनौती है।
बासित ने माना कि उड़ी की घटना के बाद दोनों तरफ से सैन्य तैयारियों के संकेत मिल रहे थे। “मैं ज़रा भी परेशान नहीं हूं कि हम युद्ध करने जा रहे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि पाकिस्तान और भारत को युद्ध के प्रचार से कुछ हासिल नहीं होगा। युद्द समाधान नहीं है बल्कि इससे और समस्याएं पैदा होती है।'
भारत में हमले का आव्हान करने वाले पाकिस्तान में उग्रवादी संगठनों के नेताओं के खुलेआम घूमने के बारे में पूछे जाने पर बासित ने कहा कि ये समस्या दोनों तरफ है। “बदक़िस्मती से ये आवाज़े भारत में भी सुनाई देंगी लेकिन न तो हमारी और न ही आपकी नीति इनसे प्रबावित है। लोग हर तरह की बात करेंगे लेकिन महत्वपूर्म ये है कि सरकारें क्या सोच रही हैं और क्या कर रही हैं।”
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