नयी दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने झूठे हलफ़नामा दायर कर प्रज्ञा ठाकुर को जेल में डाला था लेकिन उनकी सरकार ने निष्पक्ष जांच करवाकर उन्हें न्याय दिलाया।
गडकरी सोमवार को यहां इंडिया टीवी मेगा कॉन्क्लेव संवाद में रजत शर्मा के सवालों के जवाब दे रहे थे। इस सवाल पर कि मोदी-सरकार के सत्ता में आने के दो साल के बाद ही इशरत जहान जहां आतंकवादी बन गईं वहीं मालेगांव बम विस्फोट की मुख्य आरोपियों में से एक प्रज्ञा ठाकुर को NIA ने क्लीन चिट दे दी, गडकरी ने कहा कि प्रज्ञा ठाकुर को झूठे आरोप लगाकर फंसाया गया था और बेवजह आठ साल तक जेल में रखा गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार ने इशरत जहान मामले में मोदी और अमित शाह को फंसाने के लिए अदालत में झूठे हलफ़नामें दायर किए।
गडकरी ने मीडिया एक वर्ग को आड़े हात लेते हुए कहा कि इशरत जहान को लेकर उनकी सरकार की तो आलोचना करता है लेकिन जब मुंबई आतंकी हमले की साज़िश में शामिल डेविड हेडली जब ख़ुद इशरत जहान को आतंकी बताता है तो मीडिया का एक तबका ख़ामोश रहता है। डेविड हेडली RSS का स्वयंसेवक तो था नहीं, फिर मीडिया उसक बयान को लेकर चुप क्यों है?
मोदी सरकार आरएसएस के इशारे पर नहीं चल रही
गडकरी ने इस आरोप का खंडन किया कि मोदी सरकार आरएसएस के इशारे पर चलती है। उन्होंने कहा कि संघ सरकार के काम काम काज में कोई हस्तक्षेप नही करता। रजत शर्मा ने चुटकी लेते हुए पूछा कि क्या आपके पीछे आरएसएस महाशक्तिका का हाथ है, गडकरी ने कहा कि उनके ऊपर इस संस्था का न तो कोई हाथ नहीं है और न ही वह सरकार के काम कामकाज में हस्तक्षेप करती है। हमारे लोग लोग आरएसएस से जुड़े रहे हैं और उसकी विचारधारा को मानते हैं क्योंकि क्योंकि वह देशभक्ति सिखाती है, मोदी भी संघ के प्रचारक रहे हैं लेकिन ये कहना बिल्कुल ग़लत होगा कि सरकार संघ के दिशा-निर्देश पर काम करती है। मोदी सरकार पूरी तरह स्वतंत्र रुप से काम करती है और संघ का इससे कोई लेना देना नहीं है। हां मैं दबंग हूं और निर्भीकता से काम करता हूं।
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