नई दिल्ली: मंगोलिया के प्रधानमंत्री चिमद सेखानबिलग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आधिकारिक यात्रा पर उन्हें खेल समारोह में भूरे रंग का घोड़ा 'कंटक' भेंट दिया गया था। पर अफसोस मोदी उसको भारत नही ला पाए। भारत के घरेलू कानून पशुओं को उपहारस्वरूप देने या लेने की इजाजत नहीं देते।
दूसरा कारण यह था भारत का गर्म माहौल, यह घोड़ा सिर्फ ठंडे माहौल में रह सकता है। कंथक नाम के घोड़े के गिफ्ट मिलने की तस्वीर नरेंद्र मोदी ने खुद ट्वीट की थी। उन्हें इस घोड़े को मंगोलिया के भारतीय दूतावास में ही छोड़कर आना पड़ा।
2005 में पर्यावरण और वन मंत्रालय ने पशुओं के उपहार आदि की प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगा दिया था। कानून के हिसाब से इस तरह के गिफ्ट लेने की मनाही नहीं है। यह उपहार देने वाले देश की इच्छा पर निर्भर करता है।
हालांकि यह कानून भारत को किसी अन्य देश को पशु उपहार में देने की इजाजत नहीं देता है और न ही विदेशों से उपहार में मिले पशुओं को भारत लाया जा सकता है।
इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और जॉर्ज फर्नांडीज और जसवंत सिंह समेत कई पीएम और मंत्रियों ने भी अपने विदेशी समकक्षों को उपहार में जानवर भेंट किए जा चुके है।
इससे पहले उपहार में मिले जानवरों को एनडीए सरकार के समय भारत लाया गया था। तब विदेश मंत्री जसवंत सिंह को सऊदी क्राउन प्रिंस ने एक घोड़ा और घोड़ी का जोड़ा उपहार में दिया था।
भारतीय चिड़ियाघरों को विदेशों से ऐसा उपहार मिलते रहे हैं। दिल्ली चिड़ियाघर में एक अफ्रीकी हाथी को जिम्बाब्वे ने भारतीय चिड़ियाघर को गिफ्ट किया था।
दरअसल ऐसे जानवर एक खास क्लाइमेट में पैदा होते हैं या पलते हैं। अलग क्लाइमेट में स्थानांतरित होने से इनके जीवन पर खतरा पैदा हो जाता है। पशु संरक्षण को लिए काम करने वाले कार्यकर्ता भी डिप्लोमैटिक गिफ्ट्स में जानवरों के आदान-प्रदान का विरोध करते रहे हैं।
भूरे रंग का घोड़ा मोदी को भेंट करने के समय मंगोलियाई पीएम ने कहा कि इसका नाम कंथक इसलिए रखा गया है कि क्योंकि भगवान गौतम बुद्ध के घोड़े का नाम भी यही था।
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