मथुरा: केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने आज यहां कांग्रेस या उसके किसी नेता का नाम लिए बिना सवाल खड़ा किया कि केवल नारे लगाने से ही गांव, गरीब और किसान का भला नहीं हो सकता। सिंह आज दीनदयाल धाम नगला चंद्रभान में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ववर्ती राजनैतिक पार्टी भारतीय जनसंघ के संस्थापक पं. दीनदयाल उपाध्याय की सौवीं जयंती के अवसर पर उनके पैत्रृक गांव में आयोजित कृषि विकास मेले का उद्घाटन करने के लिए आए थे।
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इस अवसर पर उन्होंने दीनदयाल धाम परिसर में 50 लाख रुपए की लागत से स्थापित किए जा रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लाण्ट एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय कृषक छात्रावास का शिलान्यास किया। उन्होंने किसानों के कल्याण के दावे करने वाले राजनैतिक दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, देश पर 60 बरस तक राज करने वाले एक परिवार ने आखिर किसानों की भलाई के लिए ऐसा क्या किया जो आज उनके हित की बात करने का दावा कर रहा है।
उन्होंने कहा, अगर देश ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को 50 बरस पहले भी अपना लिया होता तो आज देश के किसानों की यह दुर्गति नहीं होती। सिंह ने कहा कि एक बार 1992 में जरूर इस बात पर विचार किया गया लेकिन जल्द ही उस विचार को भुला दिया गया। इसलिए अब तक अपनाई गई व्यवस्था से किसानों का कोई भला नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यूरोप में पनपे और फिर चीन तथा रूस तक फैला मार्क्सवाद का अब क्या हाल हो गया है, उसके फलादेश दिखाई दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गांधीजी भी यही कहते थे कि हिन्दुस्तान गांवों का देश है। उन्होंने 47 में अंतरिम सरकार में इसलिए गांव से आए बाबू राजेंद्र प्रसाद को कृषिमंत्री बनाया था। लेकिन बाद में सरकारों ने खेती और किसानों के बारे में फिर उस तरह नहीं सोचा गया, जैसे कि सोचा जाना चाहिए था। गरीबों के उत्थान की सारी योजनाएं उल्टी हो गईं, जिसका परिणाम आज पूरा देश भोग रहा है।
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