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केंद्र को झटका, अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार बहाल करने का SC का आदेश

नयी दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज एक बड़ा फ़ैसला करते हुए अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार बहाल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वहां राष्ट्रपति शासन लगाना असंवैधानिक था और

Nabam Tuki- India TV Hindi
Nabam Tuki

नयी दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज एक बड़ा फ़ैसला करते हुए अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार बहाल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वहां राष्ट्रपति शासन लगाना असंवैधानिक था और केंद्र को 16 दिसंबर 2015 की स्थित फ़ौरन बहाल करनी चाहिये। ये फ़ैसला कोर्ट की संविधान पीठ ने किया है।

कोर्ट ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में नुबाम तुकी की सरकार को बहाल किया जाए। कोर्ट का ये फ़ैसला मोदी सरकार के लिए एक बड़ा झटका है।

 उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि अरूणाचल प्रदेश विधानसभा का सत्र एक माह पहले बुलाने का राज्यपाल का फैसला संविधान का उल्लंघन है और यह रद्द करने लायक है। उसने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही के संचालन से जुड़ा राज्यपाल का निर्देश संविधान का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल के नौ दिसंबर, 2015 के आदेश की अनुपालना में विधानसभा द्वारा उठाए गए सभी कदम और फैसले लागू दरकिनार करने लायक हैं।

कोर्ट की संविधान पीठ ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह प्रदेश में जल्द से जल्द सरकार बहाल करे।

उधर पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा हुई है।

उन्होंने कहा कि वे विधायकों की बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे।

घर के चिराग़ों से ही घर में लगी थी आग

आपको बता दें कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी लेकिन पार्टी में बग़ावत के बाद सरकार गिर गई थी और केंद्र ने वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। बाद में बीजेपी के समर्थन से बागियों ने सरकार बना ली थी।

इसी साल फ़रवरी में कई महीनों के राजनीतिक संकट के बाद अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी के सहयोग से कांग्रेस के बागी नेता कलिखो पुल ने राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। कलिखो पुल को कांग्रेस के 19 बागी विधायकों का समर्थन और बाहर से 11 बीजेपी विधायकों और दो निर्दलीयों का समर्थन हासिल था. राज्य में 60 विधानसभा सीटें हैं।

कलिखो पुल की हसरत थी CM बनने की

ग़ौरतलब है कि राज्य में संवैधानिक संकट की शुरुआत बीते साल तब हुई जब 60 सदस्यों वाली अरुणाचल विधानसभा में तब की कांग्रेस सरकार के 47 विधायकों में से 21 (दो निर्दलीय) विधायकों ने अपनी ही पार्टी और मुख्यमंत्री के खिलाफ बगावत कर दी थी। नबम तुकी और उनके कट्टर प्रतिद्वंदी कलिखो पुल के बीच ठनी हुई थी। पुल तुकी की जगह राज्य का मुख्यमंत्री बनने की हसरत रखते थे। इसके बाद 26 जनवरी 2016 को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था।

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