दिल्ली: उत्तराखंड के नैनीताल में तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रदेश प्रचारको की बैठक में जहाँ संघठन को मज़बूत करने की रूप रेखा तैयार की जा रही है, वही मोदी के काम काज से संघ ने नाखुशी ज़ाहिर की है। सूत्रों की माने तो संघ की बैठक में पीएम मोदी के कामो की समीक्षा के बाद ही संघ अगला कदम उठाएगा। संघ का मानना है कि मोदी सरकार आर एस एस के एजेंडे से भटकी है, इस पर लगाम लगाना ज़रूरी है। देश भर से आये 41प्रांतो के प्रांत प्रचारक और संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी इसमें हिस्सा ले रहे है।
इस बार RSS ने नैनीताल की तलहटी में बने पार्वती प्रेम जगाती सरस्वती विहार स्कूल को प्रांत प्रचारको की बैठक के लिए चुना है। तीन दिवसीय बैठक को कामयाब करने के RSS के सर संघ चालक मोहन भागवत कई दिनों से यहाँ डेरा डाले हुए थे।
RSS कश्मीर में बढ़ रहे धारा 170, राष्ट्रवाद, आतंकवाद, स्वदेशी रोज़गार, कश्मीरी पंडितो की घर वापसी जैसे मुद्दो पर अलग सोच रखता है। लेकिन मोदी सरकार उस पर खरी नहीं उतरी है, इसे लेकर संघ चिंतित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'प्रधानमंत्री' की कुर्सी तक ले जाने में संघ की विशेष भूमिका रही है। इस बैठक में इन सभी बिन्दुओ पर मंथन होने की सम्भावनाये व्यक्त की जा रही है। यही कुछ ऐसे मुद्दे है जो संघ सार्वजानिक रूप से उठता रहा है।
RSS के बड़े नामो में सर संघ चालक मोहन भागवत, सर कार्यवाहक सुरेश जोशी, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैध सहित दो सौ से ज़्यादा पदाधिकारी मौजूद है । बैठक की सभी कार्यवाहियां गोपनीय रखी गई है। मीडिया कर्मियों को भी इस बैठक की कार्यवाही से दूर रखा जा रहा है। कल 24 जुलाई को बैठक का अंतिम दिन है। सम्भावना है संघ बैठक समाप्ति के बाद प्रेस ब्रीफिंग करेगा।
अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैध का कहना है कि संघ सुधार और विस्तार को प्राथमिकता देने पर मंथन किया है । जो लोग अब तक संघ से परहेज करते थे,ऐसे लोग भी संघ के साथ आ रहे है। इससे इसका विस्तार हो रहा है।
हालांकि अभी यह साफ़ नहीं हुआ है कि इस अहम बैठक का गोपनीय एजेंडा क्या है ? बैठक में किन किन मुद्दो पर चर्चा हो रही है ? लेकिन कयास लगाया जा रहा है कि संघ संघठन को मज़बूती प्रदान करने और मोदी सरकार पर दवाव बनाने के अलावा राज्यों ने निकट भविष्य में होने वाले चुनाओ में संघ ने अपनी भूमिका तय कर रहा है।
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