नई दिल्ली: शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में असदुद्दीन ओवैसी और विधायक इम्तियाज़ जलील को घेरते हुए कहा गया है कि, "पहले अवैध मस्जिदें तोड़ो, वंदे मातरम कहो, फिर उपदेश की बात करो।"
MIM के विधायक इम्तियाज जलील ने यह मांग रखी है कि सरकारी स्थानों के बजाय पर निजी स्थान पर नेताओं के स्मारक बनाएं जाएं वह भी बगैर सरकारी पैसे के। नेताओं के नाम से केवल सरकारी अस्पताल बनाए जाने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो वह न्यायालय जाएंगे।
पूरे मामले में सामना का कहना है कि महाराष्ट्र में शिवजी महाराज, बाल ठाकरे और गोपीनाथ मुंडे के स्मारक बनाए जाने हैं और इसी वजह से MIM की आंखों में से ख़टक रहा है।
सामना का कहना है कि MIM के आदर्श औरंगजेब और अफजल खान जैसे लोग हैं। उसी वजह से वह हमारे नेताओं के स्मारक बनाने का विरोध कर रहे हैं। और अगर MIM को सरकारी खजाने की चिंता है तो हज पर होने वाले सरकारी बजट का उपयोग भी सामाजिक कार्यों में करने की बात कहें।
सामना ने साफ कहा है कि, किसी को भी महाराष्ट्र के प्रेरणा स्थानों के संबंध में तांग अड़ाने की जरुरत नहीं है।
Latest India News