बर्लिन: भारतीय दवा निर्माता कंपनी जीवीके बायोसाइंसेज की तकरीबन 700 जेनरिक दवाइयों पर यूरोपीय संघ (ईयू) ने प्रतिबंध लगा दिया है। यह कार्रवाई क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़ों में खामियां पाए जाने के बाद की गई है। जीवीके ने इन सभी आरोपों को नकार दिया है।
फेडरल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिसंस एंड मेडिकल प्रोडक्ट्स जो कि जर्मनी की दवा नियामक संस्था है उनके मुताबिक यूरोपीय संघ के 28 सदस्य देशों में इन दवाओं पर 21 अगस्त से प्रतिबंध लागू हो जाएगा। जिससे इस तारीख के बाद ना ही इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा और ना ही दवा कंपनियां, थोक विक्रेता और खुदरा दुकानदार इसे बेच पाएंगे। इस नियामक संस्था ने बताया कि जीवीके इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकती है, लेकिन उसका कोई तुरंत प्रभाव नहीं होगा।
जनवरी में इन दवाओं पर रोक लगाने की सिफारिश के बाद यह कार्रवाई की गई है। ईएमए के अनुसार जीवीके कंपनी ने इन दवाइयों के क्लीनिकल ट्रायल के फर्जी आंकड़े दिए हैं। फ्रांसीसी मेडिसंस एजेंसी ने पिछले साल मई में दवा निर्माता कंपनी के हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला की जांच की थी, जिसमें क्लीनिकल ट्रायल के आंकड़ों में फर्जीवाड़े की बात सामने आई थी। नियामक एजेंसी ने ईसीजी के आंकड़ों में हेरफेर पाया था।
ईएमए के मुताबिक इनके अध्ययन के लिए लंबा वक्त लेना और कर्मचारियों की संख्या आदि से क्लीनिकल ट्रायल की सत्यता पर संदेह हुआ था। जीवीके बायोसाइंसेज ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कंपनी ने एजेंसी से दोबारा जांच करने की मांग की है। दूसरी तरफ, जर्मनी की दवा एजेंसी ने यह नहीं बताया कि प्रतिबंधित दवाओं के सेवन से लोगों पर क्या विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।